12 साल सत्ता में रहने के बाद भी जल निकासी तक नहीं सुधार पाई सरकार... हुड्डा बोले- BJP ने गुरुग्राम को मिलेनियम सिटी से बना दिया डूबता शहर
बारिश होते ही सड़कें और कॉलोनियां बन जाती हैं तालाब, केंद्रीय मंत्री के कांग्रेस पर आरोप को बताया हास्यास्पद
Gurugram Waterlogging : गुरुग्राम में बारिश के बाद सड़कों पर उतरे पानी ने अब सियासी पारा भी चढ़ा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में आधुनिक आईटी हब के रूप में विकसित हुआ गुरुग्राम आज बारिश आते ही डूबने वाला शहर बन गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने 12 साल के शासन में शहर की बुनियादी व्यवस्थाएं सुधारने के बजाय उसे जलभराव, जाम और गंदगी के हवाले कर दिया।
मीडिया से बातचीत में हुड्डा ने कहा कि थोड़ी-सी बारिश होते ही सड़कें, गलियां और कॉलोनियां पानी में डूब जाती हैं। सीवरेज व्यवस्था जवाब दे जाती है और पानी की निकासी के इंतजाम दिखाई नहीं देते। उन्होंने कहा कि जिस गुरुग्राम को कांग्रेस सरकार ने आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आईटी हब के रूप में खड़ा किया था, उसकी मौजूदा तस्वीर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। इस मौके पर पूर्व मंत्री व नूंह विधायक आफताब अहमद भी उनके साथ मौजूद रहे।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए हुड्डा ने गुरुग्राम की बदहाली के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने पर भाजपा के केंद्रीय मंत्री पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा को सत्ता संभाले 12 साल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि 12 साल बहुत लंबा समय होता है। इतने समय में पूरा नया शहर बसाया जा सकता है, लेकिन भाजपा पहले से बसे-बसाए आधुनिक शहर की व्यवस्थाएं तक नहीं संभाल पाई। हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस के शासन में गुरुग्राम में बारिश के बाद इस स्तर का जलभराव, गंदगी और अव्यवस्था देखने को नहीं मिलती थी।
गंदगी के ढेर, सफाई कर्मचारी सड़क पर
नेता प्रतिपक्ष ने जलभराव के साथ शहर की सफाई व्यवस्था को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम समेत पूरे हरियाणा में सफाई कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी जायज मांगों पर ध्यान नहीं दे रही। हुड्डा ने कहा कि बारिश के मौसम में पहले से चरमराई सफाई व्यवस्था लोगों की मुश्किल और बढ़ा रही है। जगह-जगह जमा गंदगी और जलभराव से बीमारियों का खतरा पैदा हो रहा है और इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम की पहचान केवल ऊंची इमारतों और कॉरपोरेट दफ्तरों से नहीं है। एक अंतरराष्ट्रीय शहर के लिए मजबूत जल निकासी, सीवरेज और सफाई व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। अगर हर बारिश में शहर डूबता है तो विकास के दावों की असली परीक्षा भी इसी व्यवस्था में होती है।

