10 साल गांव में सेवा के बाद भी नहीं ले सकते शहर का विकल्प

कॉलेज शिक्षकों की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी में खामियां

10 साल गांव में सेवा के बाद भी नहीं ले सकते शहर का विकल्प

चंडीगढ़, 11 अगस्त (ट्रिन्यू)

हरियाणा सरकार सभी विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी तैयार करने में जुटी है। स्कूल शिक्षा विभाग के बाद अब उच्चतर शिक्षा विभाग यानी कॉलेजों के शिक्षकों के तबादले ऑनलाइन करने की योजना है। पॉलिसी को सरकार मंजूरी भी दे चुकी है, लेकिन दो बड़ी कमियों की वजह से पॉलिसी पर अभी से विवाद खड़ा हो गया है। गांव में लम्बी सर्विस के बाद भी कॉलेज प्राध्यापक शहर के कॉलेजों को पहले विकल्प के रूप में नहीं भर सकेंगे। इसी तरह से उम्र के नंबरों को लेकर भी विवाद बना हुआ है। पॉलिसी में सर्विस को कोई अहमियत नहीं दी। अलबत्ता, जिस प्राध्यापक की जितनी अधिक उम्र है, उसे उतने ही अधिक अंक मिलेंगे। आमतौर पर लम्बी सर्विस वालों को यह फायदा मिलता रहा है। इसके चलते उन प्राध्यापकों के अंक कम जुड़ रहे हैं, जो कम उम्र में सरकारी सेवा में आ गए।

सूत्रों का कहना है कि उम्र का क्राइटेरिया कुछ लोगों ने अपनी पहुंच से इसमें जुड़वाया है। हर वर्ष के लिए उम्र का एक अंक मिलेगा। यानी अगर किसी प्राध्यापक की उम्र 50 वर्ष है तो उसे 50 अंक मिलेंगे और किसी की 55 है तो उसे 55 अंकों का लाभ सीधे तौर पर मिलेगा। ट्रांसफर पॉलिसी में पसंद का स्टेशन मिलने के लिए अंकों का आकलन जरूरी है। इसी वजह से उन प्राध्यापकों को सीधे तौर पर फायदा होगा, जिनकी उम्र अधिक है। उन्हें शहरों में ही मनचाहा स्टेशन मिलता रहेगा।

ट्रांसफर पॉलिसी में साफ है कि एक बार तबादला होने के बाद प्राध्यापक को 5 वर्षों के लिए बदला नहीं जाएगा। अकेले उच्चतर या स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए ही नहीं स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के लिए भी शर्त है कि शुरुआत के कुछ वर्ष उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देनी होगी। कॉलेजों में ऑनलाइन ट्रांसफर के लिए बनाई गई पॉलिसी में शहर का कॉलम बाद में है और गांव का पहले। ऐसे में उन प्राध्यापकों को अब भी गांव के ही स्टेशन पहले भरने होंगे, जो पिछले 5, 10 या 15 वर्षों से गांवों के कॉलेजों में कार्यरत हैं।

विभाग अपने ही नियमों की कर रहा अनदेखी

उच्चतर शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार सीनियर ग्रेड और िसलेक्शन ग्रेड के लिए भी क्रमश: 3 और 2 साल की गांव में सर्विस होनी अनिवार्य है, लेकिन इसके बाद शहरों में पोस्टिंग में कोई दिक्कत नहीं रहती। ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी में इन नियमों का भी ख्याल नहीं रखा गया है। इससे प्रभावित प्राध्यापकों ने यह मुद्दा शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर तक पहुंचाया है। हालांकि इस पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि इससे बड़ा विवाद आने वाले दिनों में खड़ा हो सकता है।

300 से ज्यादा कर्मचारी तो ऑनलाइन ट्रांसफर

प्रदेश सरकार ने ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के लिए तय शर्तों में भी बदलाव किया है। मुख्य सचिव की ओर से नई गाइडलाइन भी जारी कर दी है। पहले यह तय हुआ था कि जिस भी विभाग में 500 से अधिक कर्मचारियों का कैडर है, उसकी ट्रांसफर होगी। अब इसे घटाकर 300 कर दिया है। यानी जिन पदों पर कर्मचारियों की संख्या 300 से अधिक है, उनकी भी ऑनलाइन ही बदली होगी।

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