मंदिरों को केवल पूजा-अर्चना का केंद्र न रखकर उन्हें सामाजिक सेवा, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसरोकारों से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। पट्टीकल्याणा स्थित माधव सृष्टि परिसर में शाश्वत हिंदू प्रतिष्ठान के तीन दिवसीय अभ्यास वर्ग एवं कार्यकारिणी बैठक की पूर्व संध्या पर आयोजित पत्रकार वार्ता में संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री संजय शर्मा और संयोजक दुष्यंत मेहता ने संगठन की भावी योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संगठन देशभर में करीब 200 मंदिरों को चिन्हित कर वहां ‘शाश्वत प्रांगण’, ‘शाश्वत कुशल’, ‘शाश्वत बाजार’, ‘शाश्वत कार्ड’ और ‘शांति सेवा योजना’ जैसी पहल शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के देवबंद सहित उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और बंगाल के तीन मंदिरों से प्रस्तावित है।
संगठन पदाधिकारियों के अनुसार ‘शाश्वत प्रांगण’ के माध्यम से मंदिर परिसरों में स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कार और सेवा गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि ‘शाश्वत कुशल’ और ‘शाश्वत बाजार’ का उद्देश्य युवाओं को कौशल तथा स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है। इसके तहत देशभर में 200 से अधिक दुकानें और कॉम्प्लेक्स विकसित करने की योजना बनाई गई है।
‘शाश्वत कार्ड’ को संगठन की योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। पदाधिकारियों के मुताबिक यूपीआई जैसी डिजिटल व्यवस्था से जोड़कर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को पॉइंट दिए जाएंगे, जिनका इस्तेमाल निर्धारित दुकानों पर सामान खरीदने में किया जा सकेगा।

