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यमुनानगर के दुष्यंत जौहर ने माउंट एवरेस्ट पर विजय हासिल की

हौसले को सलाम : पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने दी बधाई

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यमुनानगर के युवक दुष्यंत जौहर एवरेस्ट पर। -हप्र
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23 मई, 1984 में पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल ने एवरेस्ट पर पहुंचकर विजय हासिल की थी। उसके बाद कई और लोगों के नाम इस उपलब्धि में जुड़े। अब यमुनानगर के 27 वर्षीय युवक दुष्यंत जौहर ने बिना किसी गाइड और बिना किसी सहायता के एक अन्य युवक के साथ मिलकर यह उपलब्धि हासिल की है। यमुनानगर के पुलिस स्पेशल सैल के इंचार्ज जगदीश बिश्नोई के सुपुत्र दुष्यंत जौहर ने माउंट एवरेस्ट की 5364 मीटर ऊंचाई पर पहुंचकर यह उपलब्धि हासिल की है। 11 दिन के 153 किलोमीटर लंबे रास्ते को दो युवकों ने 11 दिनों में पूरा किया। पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने युवक को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

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यमुनानगर में विशेष बातचीत में दुष्यंत जौहर ने बताया कि उन्होंने पूर्व में स्टेट साइकिलिंग चैंपियनशिप जीती है। कई मैराथन में हिस्सा लिया और विजय प्राप्त की। पिछले साल 90 किलोमीटर लंबे नेपाल के ट्रैक को भी उन्होंने सफलतापूर्वक हासिल किया। तभी उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर जाने का फैसला किया था, जिसमें उन्होंने सफलता हासिल की है। दुष्यंत जौहर ने बताया कि उन्होंने बिना किसी गाइड और बिना किसी सहायता के एक अन्य युवक के साथ मिलकर यह उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि उनका सपना जहां 8000 मीटर ऊंचाई तक जाने का है, वहीं साथ-साथ वह यूपीएससी की भी तैयारी कर रहे हैं ताकि देश और समाज की सेवा कर सकें।

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दुष्यंत का कहना है कि -30 डिग्री तापमान में अगर चलते-चलते पसीना आ गया तो इस पसीने का पानी जम जाता है, ऐसे में कई तरह की मुश्किलें आती हैं, लेकिन उसमें आपके हौसले बुलंद होने चाहिए। शुरू में 5 किलोमीटर ट्रैकिंग, 10 किलोमीटर, इस तरह धीरे-धीरे ट्रैकिंग बढ़ानी चाहिए। जब 100 किलोमीटर तक ट्रैकिंग में कोई दिक्कत न आए तभी इस तरह का रास्ता चुनना चाहिए। अपने बेटे की उपलब्धि पर पिता स्पेशल सैल इंचार्ज जगदीश बिश्नोई और माता रामकली ने गर्व महसूस करते हुए कहा कि वह अन्य बच्चों को भी इसी तरह के काम के लिए सीख देना चाहेंगे, नशे से दूर रहे और खेलों की तरफ ध्यान रखें।

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