DGP OP Singh Retirement : रिटायरमेंट से पहले डीजीपी ओपी सिंह का पुलिस को सख्त संदेश; बढ़ेंगी अपराध की चुनौतियां, ‘फ्रंट फुट’ पर खेलना होगा
आईपीएस की ट्रेन से उतरते वक्त बोले, अब लेखन होगा अगला पड़ाव
DGP OP Singh Retirement : हरियाणा के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने सेवानिवृत्ति से ठीक पहले पुलिस बल को नए साल के लिए सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि साल 2026 में प्रदेश की पुलिस के सामने अपराध को लेकर चुनौतियां और भी बढ़ने वाली हैं। अपराध के आंकड़ों पर शोर मचना तय है और इससे निपटने का एकमात्र रास्ता है -अपराध रोकथाम पर पूरी ताकत झोंक देना।
बुधवार को सेवानिवृत्त होने से पहले 1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ओपी सिंह ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम एक भावुक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने न केवल अपने लंबे प्रशासनिक सफर को याद किया, बल्कि भविष्य की रणनीति, पुलिसिंग के दर्शन और अपने निजी जीवन के अगले पड़ाव की भी झलक दी। ओपी सिंह ने अपने विदाई संदेश को बेहद मानवीय और दार्शनिक अंदाज में लिखा।
उन्होंने कहा कि 1992 में वे आईपीएस रूपी ट्रेन में सवार हुए थे और उसी दिन यह तय हो गया था कि उनका अंतिम स्टॉप 31 दिसंबर, 2025 होगा। अब इस स्टेशन पर उतरना है, लेकिन जीवन की यात्रा अभी जारी है। उन्होंने पुलिस सेवा के दौरान मिले सहयोग, अनुभव और रिश्तों के लिए सभी का आभार जताया और कहा कि आईपीएस और हरियाणा पुलिस ही उनकी पहचान रही है। जो कुछ भी वे कर पाए, उसमें इस वर्दी और इस संस्थान की बड़ी भूमिका रही है।
अपराध के मोर्चे पर बढ़ेगा दबाव
डीजीपी ओपी सिंह ने साफ शब्दों में आगाह किया कि भले ही साल 2025 में 2024 के मुकाबले अपराध दर में कमी रही हो, लेकिन 2026 में तस्वीर बदल सकती है। अब अपराध के आंकड़ों का आकलन बेसलाइन के आधार पर होगा, जिससे अपराध दर पर सवाल और दबाव दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि इसका समाधान आंकड़ों से नहीं, ज़मीनी कार्रवाई से निकलेगा। ज्यादा से ज्यादा पुलिसकर्मियों को अपराध रोकने में लगाया जाए, हिंसक अपराधियों के खिलाफ व्यवस्थित और निरंतर अभियान चलाया जाए और कानून के राज को हर हाल में मजबूत किया जाए।
असली आजादी की लड़ाई अभी बाकी
अपने पत्र में ओपी सिंह ने सामाजिक सरोकारों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने लिखा कि आज़ादी की असली लड़ाई मुंहजोरों, सनकियों और ठगों के आतंक के खिलाफ है। दुर्भाग्य से यही संघर्ष आज भी जारी है। ऐसे में पुलिस से अपेक्षा है कि वह कानून के राज और आमजन के संघर्ष में पूरी मजबूती से खड़ी रहे। उन्होंने पुलिस को केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा की रीढ़ बताया।
बदलाव और अभियानों का जिक्र
अपने सीमित कार्यकाल के बावजूद ओपी सिंह ने हरियाणा पुलिस में कई महत्वपूर्ण बदलावों और अभियानों की शुरुआत की। पत्र में उन्होंने ‘प्ले फॉर इंडिया’ अभियान, युवा कार्यक्रम, राहगीरी, एंटी-ड्रग एनफोर्समेंट, साइबर क्राइम प्रिवेंशन, फॉरेंसिक साइंस, क्राइम डेटा मैनेजमेंट और ग्रीन बिल्डिंग प्रेक्टिस जैसे क्षेत्रों में हरियाणा पुलिस की अग्रणी भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खेल, नशामुक्ति और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में पुलिस की सक्रिय भागीदारी ने उसे महज कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर समाज निर्माण का साझेदार बनाया है।
अब लेखन होगा नया अध्याय
सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन को लेकर भी ओपी सिंह ने अपने मन की बात साझा की। उन्होंने लिखा कि उन्हें लेखन में रुचि रही है और अब वे इसे अधिक समय दे पाएंगे। अपने पत्र के अंत में उन्होंने कबीरदास की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए संतोष और कर्तव्यबोध का भाव व्यक्त किया – ‘दास कबीर जतन से ओढ़ी, ज्यों-की-त्यों धर दीन्हीं चदरिया।’ पत्र के आखिरी शब्दों में उन्होंने गर्व के साथ लिखा – ‘आईपीएस और हरियाणा पुलिस मेरी पहचान है।’ यह संदेश न सिर्फ एक विदाई है, बल्कि आने वाले समय के लिए पुलिस बल को दिशा देने वाला रोडमैप भी।
