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सख्ती के बावजूद जल रही पराली, 42 पर एफआईआर

दीवाली से लगातार जहरीली बनी हुई है जींद की आबोहवा

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जींद के मलिकपुर गांव में सीआरएम मशीन से धान की फसल के अवशेषों को मिट्टी में मिलाने का डेमो देते कृषि विभाग अधिकारी। -हप्र
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जसमेर मलिक/हप्र

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जींद, 5 नवंबर

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सरकार और प्रशासन की तमाम सख्ती के बावजूद जिले में धान की पराली और फसल अवशेष जल रहे हैं। किसान रात को अंधेरे का फायदा उठाकर फसल अवशेष जलाते हैं, ताकि सैटेलाइट व प्रशासन की नजरों में नहीं आएं। अब तक फसल अवशेष जलाने पर जिले में 42 किसानों पर मामले दर्ज हो चुके हैं।

इस सीजन में जिले में लगभग 55 एकड़ में फसल अवशेष जल चुके हैं। यह अलग बात है कि पिछले साल से तुलना करें, तो आंकड़ों के अनुसार फसल अवशेष जलाए जाने में काफी कमी आई है। पिछले साल 3 नवंबर तक फसल अवशेष जलने की 176 लोकेशन मिली थी, जबकि इस साल 3 नंबवर तक ऐसी 67 लोकेशन मिली हैं, जिनमें से 52 जगह फसल अवशेष जले पाए गए हैं। कलौदा और डिंडोली गांव में फसल अवशेष जलने की दो लोकेशन आई थी। दोनों जगह फसल अवशेष जले पाए जाने पर संबंधित दोनों किसानों के खिलाफ एफआईआर के लिए कृषि विभाग ने पुलिस को शिकायत दी है।

सबसे ज्यादा मामले नरवाना, उचाना में : फसल अवशेष जलाने के जिले में सबसे ज्यादा मामले नरवाना और उचाना में सामने आए हैं। प्रशासन का ध्यान भी इन्हीं क्षेत्रों पर ज्यादा रहता है। नरवाना और उचाना ब्लॉक में में पीआर धान की ज्यादा खेती होती है। पीआर धान की कटाई किसान कंबाइन से करवाते हैं और बचे हुए फसल अवशेष में आग लगा देते हैं। जींद और जुलाना ब्लॉक में बासमती धान की खेती ज्यादा होती है। बासमती धान की हाथ से कटाई करके उसकी पराली को पशु चारे में प्रयोग किया जाता है, लेकिन छठ पर्व के मद्देनजर प्रवासी लेबर के अभाव में काफी किसान बासमती धान की कटाई कंबाइन से करवा रहे हैं। कंबाइन से कटाई के बाद धान के फसल अवशेष में आग लगाते हैं। शाम के समय फसल अवशेषों में लगी आग से आसमान में काफी दूर तक धुएं की चादर बिछ जाती है। जुलाना व जींद क्षेत्र की सैटेलाइट से भी कम ही लोकेशन मिल रही हैं।

आबोहवा में अब आकर हुआ कुछ सुधार : जींद जिले में दीवाली से आबोहवा खराब होने लगी थी। इसमें अब आकर कुछ सुधार हुआ है। दीवाली से पहले और दीवाली के दिन तथा बाद में प्रतिबंधित बम और पटाखे बजाए जाने से जींद की आबोहवा जहरीली हुई थी। अब धान की पराली और फसल अवशेष जलाए जाने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। रविवार को जींद का एक्यूआई 417 था, जो बेहद खतरनाक की श्रेणी में आता है। इसके लिए दीवाली पर बजाए गए प्रतिबंधित बम और पटाखों के साथ-साथ फसल अवशेषों को आग लगाए जाने को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। मंगलवार को जींद में एक्यूआई का स्तर 320 रहा, जो खराब की श्रेणी में आता है, मगर रविवार के मुकाबले इसमें सुधार जरूर हुआ है।

फसल अवशेषों को आग नहीं लगाएं किसान : डीसी

दूसरी तरफ डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने किसानों से फिर कहा है कि वह फसल अवशेषों को आग नहीं लगाएं। इससे प्रदूषण फैलता है, जिससे अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है। छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। भूमि की उर्वरा शक्ति भी कम होती है, जिससे खुद किसानों को भी नुकसान होता है। रजा ने कहा कि फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

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