Crime Control : अपराध बढ़ा तो SHO ही नहीं, सुपरवाइजरी अफसर भी जिम्मेदार; निलंबन तक की कार्रवाई के निर्देश
साइबर ठगी की रकम रिकवरी और धमकी-फायरिंग की घटनाओं पर भी विशेष निगरानी
Crime Control : हरियाणा में अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी अब थाना स्तर पर सीधे तय होगी। जिस थाना क्षेत्र में अपराध बढ़ेगा, वहां संबंधित थाना प्रभारी (एसएचओ) के साथ सुपरवाइजरी अधिकारी भी जवाबदेह होंगे। खराब प्रदर्शन और अपराध नियंत्रण में लापरवाही मिलने पर थाना प्रभारियों के निलंबन तक की कार्रवाई होगी। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने मंगलवार को प्रदेश के एडीजीपी, आईजी, पुलिस आयुक्तों और एसपी के साथ करीब तीन घंटे चली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में यह स्पष्ट संदेश दिया।
बैठक में तय किया गया कि अब केवल जिलेवार अपराध के आंकड़ों की समीक्षा नहीं होगी, बल्कि हर थाने के अपराध पैटर्न की माइक्रो लेवल पर निगरानी की जाएगी। किस थाने में कौन-सा अपराध बढ़ रहा है, उसके पीछे स्थानीय कारण क्या हैं और पुलिस ने उसकी रोकथाम के लिए क्या किया, इसका नियमित विश्लेषण होगा। डीजीपी ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित करने और सफल पुलिसिंग मॉडल दूसरे जिलों में लागू करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब पुलिसिंग का आकलन केवल कार्रवाई से नहीं, नतीजे से होगा।
सीसीटीएनएस के आंकड़ों से बनेगी रणनीति
डीजीपी ने अधिकारियों को सीसीटीएनएस में उपलब्ध आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने को कहा। इसके आधार पर अपराध के ट्रेंड और हॉटस्पॉट चिन्हित किए जाएंगे। पुलिस का जोर अपराध होने के बाद कार्रवाई से आगे बढ़कर अपराध की वजह तक पहुंचने और समय रहते प्रिवेंटिव एक्शन लेने पर रहेगा। अधिकारियों को अपने अधीन आने वाले प्रत्येक थाने की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और एसएचओ के साथ नियमित बैठक करने के निर्देश दिए गए हैं। अगली समीक्षा बैठक में प्रत्येक थाने से अपराध बढ़ने के कारण और उस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट ली जाएगी।
कुल अपराध घटा, छोटे अपराधों पर भी नजर
डीजीपी ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बीएनएस के तहत प्रदेश में कुल अपराध में 9.11 फीसदी की कमी आई है। हालांकि, किसी खास श्रेणी में अपराध बढ़ने पर उसे सामान्य आंकड़ों के पीछे छिपाने के बजाय तत्काल कारण तलाशने और कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। उन्होंने 15 जून को जारी माइक्रो प्लानिंग संबंधी निर्देशों की भी समीक्षा की। अधिकारियों से कहा गया कि छोटे अपराधों को भी नजरअंदाज न किया जाए। समय रहते इन पर कार्रवाई से गंभीर और संगठित अपराधों को बढ़ने से रोका जा सकता है।
साइबर ठगी की रकम लौटाने पर फोकस
साइबर अपराध के लंबित मामलों और शिकायतों की भी समीक्षा हुई। डीजीपी ने ठगी की रकम को जल्द फ्रीज कराने, रिकवरी कर पीड़ितों को वापस दिलाने, शिकायतों को एफआईआर में बदलने और साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी में तेजी लाने को कहा। लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश भी दिए गए। एडीजीपी सीआईडी सौरभ सिंह ने धमकी भरी कॉल, फायरिंग और अन्य गंभीर घटनाओं पर समन्वित कार्रवाई की जरूरत बताई। सोशल मीडिया पर अफवाह या भ्रामक सूचना फैलाकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिशों पर भी तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

