अफसरों से नाराज़ कांग्रेस विधायक, प्रोटोकॉल पर सियासी टकराव तेज
इस विवाद को और गंभीर तब माना जाने लगा जब पूर्व डिप्टी सीएम और पंचकूला के विधायक चंद्रमोहन बिश्नोई ने विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण को एक और औपचारिक शिकायत भेजी।
चंद्रमोहन की यह शिकायत कोई अलग-थलग मामला नहीं है। इससे पहले थानेसर के विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अशोक अरोड़ा, नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी, सिरसा के विधायक गोकुल सेतिया, शाहबाद मारकंडा के विधायक रामकरण काला, गुहला-चीका के विधायक देवेन्द्र हंस और मुलाना की विधायक पूजा चौधरी भी अपने-अपने क्षेत्रों में अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज़ होकर शिकायत कर चुके हैं। इन शिकायतों के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने इस मसले पर सख्त रुख अपनाते हुए कई अधिकारियों को तलब कर चेतावनी दी थी।
मामला सिर्फ फोन कॉल या सूचना तक सीमित नहीं है। कई बैठकों में सीटिंग अरेंजमेंट तक को शिकायत का आधार बनाया गया। कुछ विधायकों ने आरोप लगाया कि उन्हें स्थानीय पार्षदों के बाद बैठने की सीट दी गई, जो उनके संवैधानिक दर्जे के लिहाज से अपमानजनक है। खासतौर पर नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी ने दिशा कमेटी की बैठक में जिला उपायुक्त अजय तोमर पर प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाया था, जिसके बाद उपायुक्त को विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में उपस्थित होना पड़ा।
सांसद भी हुए असहज, टकराव बढ़ा
यह विवाद विधायकों तक ही सीमित नहीं रहा। कई मौकों पर कांग्रेस सांसदों ने भी प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाए हैं। रोहतक में सांसद दीपेंद्र हुड्डा की डीसी के साथ कहासुनी हो चुकी है, जबकि अंबाला में सांसद वरुण मुलाना और कुमारी सैलजा भी बैठक के दौरान अफसरों के व्यवहार को लेकर आपत्ति जता चुके हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार बदलने के बाद प्रशासन का रुझान भी बदल गया है — और यह स्थिति लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।
चंद्रमोहन का आरोप और आगे की लड़ाई
अपनी शिकायत में चंद्रमोहन ने स्पष्ट लिखा है कि कुछ अधिकारी राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहे हैं और पंचकूला के जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से संविधान दिवस समारोह की सूचना न देने को गंभीर लापरवाही बताया और विधानसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है।
