लाडो लक्ष्मी योजना में लगाई शर्तें महिला सशक्तीकरण की भावना के खिलाफ : विधायक रेनू बाला
साढौरा विधायक रेनू बाला ने बुधवार को अपने जगाधरी स्थित कार्यालय में भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। लाडो लक्ष्मी योजना को लेकर उन्होंने कहा कि यह योजना मूल रूप से महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त...
साढौरा विधायक रेनू बाला ने बुधवार को अपने जगाधरी स्थित कार्यालय में भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। लाडो लक्ष्मी योजना को लेकर उन्होंने कहा कि यह योजना मूल रूप से महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे अपमान, शर्तों और असंवेदनशील नियमों का औज़ार बना दिया है। रेनू बाला ने कहा कि 2100 की मामूली सहायता के लिए अब मां से उसके बच्चे के 80 प्रतिशत अंक मांगे जा रहे हैं। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या एक गरीब मां की मेहनत, त्याग और संघर्ष को अंकों की कसौटी पर तोला जाएगा? क्या जो बच्चा कठिन परिस्थितियों, संसाधनों की कमी और आर्थिक अभाव के बावजूद पढ़ाई कर रहा है, उसकी मां इस वजह से सहायता से वंचित कर दी जाएगी कि उसके अंक तय सीमा तक नहीं पहुंच पाए? उन्होंने कहा कि यह नीति महिला सशक्तीकरण की भावना के पूरी तरह खिलाफ है। महिलाओं को सम्मान, सहयोग और अधिकार चाहिए, न कि परीक्षा और शर्तें। रेनू बाला ने कहा सरकार यह भूल रही है कि हर परिवार की परिस्थितियां एक जैसी नहीं होतीं। गरीब और मेहनतकश परिवारों के बच्चों पर अतिरिक्त दबाव डालना और उनकी माताओं को सहायता से वंचित करना अमानवीय और अन्यायपूर्ण है। रेनू बाला ने स्पष्ट कहा कि वह इस जनविरोधी और महिला-विरोधी निर्णय का कड़ा विरोध करती है। उन्होंने मांग की कि लाडो लक्ष्मी योजना में लगाई गई इस तरह की शर्तों को तुरंत हटाया जाए ताकि सहायता बिना किसी भेदभाव के जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचे। अंत में उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं के अधिकारों की रक्षा नहीं होती और इस अन्यायपूर्ण नीति को वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनकी इस फैसले के खिलाफ लड़ाई निरंतर जारी रहेगी।

