‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ के दूसरे दिन कंपनियों ने किए एमओयू, CM सैनी बोले - फाइल नहीं, प्रोजेक्ट आगे बढ़ेंगे
गुरुग्राम के 1.10 लाख करोड़ के एमओयू में 108 कंपनियों को जमीन देने का दावा
हरियाणा ने मुंबई में चल रहे ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ अभियान के दूसरे दिन 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव हासिल किए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह की मौजूदगी में विभिन्न कंपनियों के साथ निवेश के एमओयू हुए। सरकार ने निवेशकों के सामने साफ किया कि हरियाणा में केवल निवेश की घोषणाओं तक बात नहीं रुकेगी, बल्कि परियोजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए समयबद्ध तरीके से काम किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ‘फाइल मूवमेंट’ के बजाय ‘प्रोजेक्ट मूवमेंट’ पर काम कर रही है। उन्होंने निवेशकों को नीति की स्थिरता, तेज मंजूरी और परियोजनाओं में सरकारी सहयोग की पांच गारंटियां भी दीं। मुंबई में मुख्यमंत्री ने निवेशकों को हरियाणा में पहले हुए निवेश समझौतों की प्रगति भी बताई। हाल में गुरुग्राम में हुए इंडस्ट्री पॉलिसी लॉन्च कार्यक्रम में 1.10 लाख करोड़ रुपये के एमओयू हुए थे।इनमें
एमओयू करने वाली 123 कंपनियों में से 108 को जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। हरियाणा के लिए एमओयू केवल हस्ताक्षर का कार्यक्रम नहीं, बल्कि निवेश की प्रतिबद्धता है। यानी सरकार का जोर अब नए निवेश जुटाने के साथ पुराने समझौतों को धरातल पर उतारने पर भी है। मुख्यमंत्री ने ‘हरियाणा विजन डॉक्यूमेंट-2047’ का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर से आगे ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ युवाओं की रोजगार क्षमता, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और संतुलित क्षेत्रीय विकास पर जोर रहेगा। मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न देशों के कन्सुलेट जनरल, उद्योगपति, निवेशक और वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान निवेशकों ने हरियाणा की औद्योगिक नीतियों, बुनियादी ढांचे और तेज मंजूरी व्यवस्था की सराहना की।
सरकार के अनुसार, उद्योगों को सब्सिडी का भुगतान सात दिन में करने जैसी व्यवस्थाएं निवेशकों के लिए राज्य को अधिक आकर्षक बना रही हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग के आयुक्त एवं सचिव के़ मकरंद पांडुरंग, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग, एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक सुशील सारवान और चीफ कोऑर्डिनेटर सुनील शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
निवेशकों को दी पांच गारंटी
मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत के सामने सरकार की पांच प्राथमिकताएं रखीं। इनमें नीतियों में स्थिरता, समयबद्ध फैसले और मंजूरियां, परियोजनाओं की लगातार निगरानी व मदद, उद्योग की जरूरत के अनुसार कौशल और कनेक्टिविटी तथा निवेश के साथ स्थानीय रोजगार और एमएसएमई को जोड़ना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि निवेशकों को केवल जमीन और रियायतें देना सरकार का लक्ष्य नहीं है। सरकार चाहती है कि निवेश के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे उद्योगों के लिए भी अवसर पैदा हों। मुख्यमंत्री ने उद्योग और श्रमिकों के बीच विवादों के समाधान के लिए बनाई गई उद्योग-श्रमिक मैत्री परिषद का भी उल्लेख किया।
चार हिस्सों में अलग-अलग उद्योगों का प्लान
हरियाणा ने निवेश के लिए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों की औद्योगिक क्षमता को भी सामने रखा। मुख्यमंत्री के अनुसार उत्तर हरियाणा में खाद्य प्रसंस्करण, फार्मा, वैज्ञानिक उपकरण और लॉजिस्टिक्स, मध्य हरियाणा में इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, ऑटो और भंडारण, जबकि दक्षिण हरियाणा में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ई-मोबिलिटी, जीसीसी और उन्नत विनिर्माण पर जोर दिया जाएगा। पश्चिमी हरियाणा में एग्रो-इंडस्ट्री, नवीकरणीय ऊर्जा, टेक्सटाइल और निर्यात आधारित इकाइयों को बढ़ावा देने की योजना है। सैनी ने कहा कि कृषि को भी औद्योगिक विकास से जोड़ा जाएगा। एग्रीटेक, ड्रोन, भंडारण, पैकेजिंग और खाद्य प्रसंस्करण के जरिए किसानों को उत्पादन से बाजार तक जोड़ने पर जोर रहेगा।
हरियाणा की ताकत बताकर निवेशकों को साधा
मुंबई के वित्तीय और कॉरपोरेट जगत के प्रतिनिधियों के सामने मुख्यमंत्री ने हरियाणा की आर्थिक स्थिति भी रखी। उन्होंने कहा कि देश के कुल क्षेत्रफल में हरियाणा की हिस्सेदारी करीब 1.3 प्रतिशत है, लेकिन राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में राज्य का योगदान करीब 3.6 प्रतिशत है। गुरुग्राम को वैश्विक सेवा और टेक्नोलॉजी हब, मानेसर को ऑटोमोबाइल एवं ऑटो-कंपोनेंट केंद्र और फरीदाबाद को इंजीनियरिंग व विनिर्माण केंद्र के रूप में पेश किया गया। पानीपत, यमुनानगर, अंबाला, करनाल और सोनीपत की औद्योगिक क्षमता भी निवेशकों के सामने रखी गई।
हरियाणा में निवेशक को परेशानी नहीं होने देंगे : राव नरबीर
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि हरियाणा की मजबूत सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी निवेश की बड़ी ताकत है। उनके अनुसार राज्य के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में अब करीब साढ़े तीन घंटे लगते हैं, जबकि 2014 से पहले यही दूरी तय करने में 7-8 घंटे लगते थे। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिया कि हरियाणा में निवेश करने वाले किसी भी उद्यमी को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम पहले ही दुनिया की बड़ी कंपनियों का केंद्र बन चुका है और राज्य में उद्योगों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
ऑटो सेक्टर में हरियाणा की बड़ी हिस्सेदारी
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ़ अमित कुमार अग्रवाल ने निवेशकों को हरियाणा के औद्योगिक आधार के आंकड़े बताए। उन्होंने कहा कि देश में बनने वाली करीब दो-तिहाई पैसेंजर कारें और करीब 60 प्रतिशत मोटरसाइकिलें हरियाणा में बनती हैं। ट्रैक्टर और रेफ्रिजरेटर निर्माण में भी राज्य की बड़ी हिस्सेदारी है। उन्होंने बताया कि हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय करीब चार लाख रुपये है और राष्ट्रीय जीडीपी में राज्य का योगदान 3.6 प्रतिशत के आसपास है। एनसीआर का करीब 57 प्रतिशत क्षेत्र हरियाणा में होने से राज्य को बड़ा बाजार, मानव संसाधन और औद्योगिक आधार मिलता है।

