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Inspiring Story : कमांडर देवदत्त को सीएम सैनी ने बताया ‘नायाब’, जानें एक किसान के बेटे से नौसेना अधिकारी बनने तक का सफर

602 दिन, 13 हजार किमी और 2 वर्ल्ड रिकॉर्ड, लेफ्टिनेंट कमांडर देवदत्त की कहानी

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Commander Devdutt Story : भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट कमांडर देवदत्त शर्मा ने एक नहीं, बल्कि दो-दो वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर हरियाणा और देश का नाम चमका दिया है। बुधवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंडित मोहन लाल बडौली ने उनसे मुलाकात की और उनकी उपलब्धियों को ‘नायाब’ करार दिया। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि लगातार 602 दिनों तक हाफ मैराथन पूरा करने की उपलब्धि असाधारण है।

देवदत्त ने कठोर अनुशासन और अथक परिश्रम से गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दूसरी बार जगह बनाकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। प्रदेश अध्यक्ष बडौली ने इसे हरियाणा की युवा ऊर्जा और संकल्प का प्रतीक बताया और देवदत्त को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर खेल मंत्री गौरव गौतम, कैप्टन भूपेंद्र, जवाहर सैनी और मदन चौहान सहित कई नेता मौजूद रहे।

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हिसार के खरबला गांव में पैदा हुए देवदत्त शर्मा ने कठिन परिस्थितियों को मात देते हुए अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। भारतीय नौसेना में अधिकारी रहते हुए उन्होंने लगातार 602 दिनों तक हर दिन 21.1 किमी की हाफ मैराथन दौड़ पूरी की। इन दिनों में उन्होंने 13,000 किलोमीटर की दूरी तय की, जो किसी साधारण धावक के लिए कल्पना भी नहीं। इससे पहले भी वे 82 दिनों तक लगातार 42.2 किमी की फुल मैराथन दौड़ कर अपना पहला गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुके हैं।

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युवाओं को प्रेरित करने का अनोखा सफर

देवदत्त ने सिर्फ अपने नाम रिकॉर्ड नहीं दर्ज कराए, बल्कि समाज के लिए भी एक अभियान चलाया। आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत उन्होंने भारतीय नौसेना की पहली 1500 किमी की दौड़ की योजना बनाई और उसे हरियाणा के हर जिले में पूरा किया। हर दिन 42 से 45 किमी दौड़ने के बाद वे 200 से अधिक स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में गए। युवाओं को उन्होंने तीन संदेश दिए। पहला अनुशासन अपनाओ, दूसरा नशे से दूर रहो और तीसरा सेना में करियर बनाओ। उनके व्याख्यानों ने हजारों युवाओं को प्रेरित किया।

संघर्ष से निकली सफलता की कहानी

देवदत्त की कहानी सिर्फ उपलब्धियों की नहीं, बल्कि संघर्षों की भी है। 10 साल की उम्र में पिता का साया उठ गया। मां के साथ खेतों में काम करते हुए उन्होंने घर की जिम्मेदारी संभाली। गांव के सरकारी स्कूल में सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई पूरी की। युवावस्था में वे सेना में भर्ती होने के लिए कई बार घर से छुपकर भर्ती रैलियों में पहुंचे। एनडीए की परीक्षा में पांच बार असफल होने के बाद भी उनका हौसला नहीं टूटा। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद लगातार मेहनत ने रंग दिखाया और वर्ष 2016 में वे भारतीय नौसेना में अधिकारी बन गए।

देवदत्त बने मल्टी-टैलेंटेड नौसैनिक

नौसैनिक अधिकारी होने के साथ-साथ देवदत्त एक अल्ट्रामैराथन रनर, ट्रायथलीट, पर्वतारोही, योग प्रशिक्षक और कॉम्बैट डाइवर भी हैं। उनकी जीवनशैली अनुशासन, सहनशक्ति और राष्ट्रसेवा पर आधारित है। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि एक किसान परिवार में जन्मे देवदत्त ने जीवन की कठिनाइयों से लड़ते हुए जो मुकाम हासिल किया है, वह युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। भर्ती रैलियों में दौड़ने वाले एक युवा का दो बार गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक बनना अभूतपूर्व उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि देवदत्त की कहानी हर युवा को यह संदेश देती है कि संकल्प, अनुशासन और निरंतरता से कोई भी असंभव लक्ष्य संभव बनाया जा सकता है।

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