CLU Process Changes : नायब सरकार ने सीएलयू प्रक्रिया में किया बड़ा बदलाव, अब 19 नहीं सिर्फ 3 दस्तावेज
जमीन, उद्योग, पर्यावरण और सरकारी अनुमतियों में होगा सरलीकरण
हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक सुधारों के अगले चरण में मंजूरी आधारित व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ऐसी प्रणाली विकसित कर रही है, जिसमें नागरिकों, निवेशकों और उद्यमियों को कम कागजी प्रक्रिया, कम विभागीय चक्कर व कम समय में मंजूरियां मिल सकें। वीरवार को अनुपालन में कमी व विनियामक सुधार कार्यक्रम के प्रथम और द्वितीय चरण की समीक्षा की गई।
बैठक में कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव केके पाठक और हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने विभागों को सुधारों की गति तेज करने के निर्देश दिए। बैठक में सामने आया कि भूमि उपयोग परिवर्तन यानी चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) की प्रक्रिया को पहले की तुलना में काफी आसान बनाया गया है। पहले सीएलयू अनुमति प्राप्त करने के लिए 19 दस्तावेज जमा करने पड़ते थे।
अब यह संख्या घटाकर केवल 3 दस्तावेज कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे आवेदन प्रक्रिया तेज होगी, समय और लागत दोनों घटेंगे तथा जमीन मालिकों और निवेशकों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों के लिए ऑटो-सीएलयू व्यवस्था लागू कर दी गई है, जिससे कई मामलों में स्वीकृति प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है। सरकार स्व-प्रमाणीकरण और थर्ड पार्टी प्रमाणन व्यवस्था को भी बढ़ावा दे रही है। कम जोखिम वाली इमारतों के लिए ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट अब सेल्फ-सर्टिफिकेशन के आधार पर जारी किए जा रहे हैं।
वहीं उच्च जोखिम वाली श्रेणियों में थर्ड पार्टी व्यवस्था लागू की जा रही है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ की समयसीमा 30 कार्य दिवस से घटाकर 21 कार्य दिवस कर दी है। बैठक में नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल, अग्निशमन सेवाएं के महानिदेशक शेखर विद्यार्थी, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग, नगर एवं ग्राम आयोजना के निदेशक अमित खत्री, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
70 प्रतिशत क्षेत्र में सीएलयू की जरूरत ही नहीं
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि हरियाणा के लगभग 70 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में अब सीएलयू अनुमति की आवश्यकता नहीं है। सरकार अब अन्य श्रेणियों में भी स्वचालित मंजूरी प्रणाली का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है ताकि परियोजनाओं की शुरुआत में लगने वाला समय कम किया जा सके। निवेशकों को विभिन्न विभागों से अलग-अलग मंजूरियां लेने की परेशानी कम करने के लिए हरियाणा एंटरप्राइज प्रमोशन सेंटर (एचईपीसी) को और मजबूत किया जा रहा है ताकि यह प्रभावी सिंगल-विंडो सुविधा मंच के रूप में कार्य कर सके।
‘राइट टू बिजनेस’ और सिंगल विंडो मॉडल पर जोर
बैठक में बताया गया कि राज्य प्रस्तावित राइट टू बिजनेस फ्रेमवर्क, मांग आधारित भूमि उपयोग योजना, सरल अग्नि सुरक्षा मानकों, स्वास्थ्य क्षेत्र में एकीकृत मंजूरी व्यवस्था और कानूनों व सरकारी आदेशों के केंद्रीकृत डिजिटल संग्रह की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसी शासन व्यवस्था तैयार करना है जो पारदर्शी, तकनीक आधारित और सुविधा केंद्रित हो।
उद्योगों को राहत, एमएसएमई को नए अवसर
बैठक में बताया गया कि औद्योगिक भूमि उपयोग, परियोजना संशोधन, सब-लीज और प्लॉट प्रबंधन नियमों में अधिक लचीलापन दिया गया है। औद्योगिक प्लॉटों के उप-विभाजन की सुविधा से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के लिए कम लागत पर भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई। साथ ही एफएआर (फ्लोर एरिया ऐसा), ग्राउंड कवरेज और सेटबैक नियमों में भी उदार बदलाव किए गए हैं ताकि औद्योगिक भूमि का बेहतर उपयोग हो सके।

