Chhayansa Health Probe : छायंसा में बीमारी की जांच अब 'MCDC' की आधुनिक तकनीक से, प्रशासन ने झोलाछाप डॉक्टरों पर भी कसा शिकंजा
Chhayansa Health Probe : हथीन उपमंडल के गांव छायंसा में पिछले डेढ़ महीने से गहराते स्वास्थ्य संकट को देखते हुए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की जांच तकनीक का सहारा लिया जाएगा। गांव में फैली संदिग्ध बीमारी की गुत्थी सुलझाने के लिए...
Chhayansa Health Probe : हथीन उपमंडल के गांव छायंसा में पिछले डेढ़ महीने से गहराते स्वास्थ्य संकट को देखते हुए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की जांच तकनीक का सहारा लिया जाएगा। गांव में फैली संदिग्ध बीमारी की गुत्थी सुलझाने के लिए मेडिकल सीबीआरएन डिफेंस कंसोर्टियम (MCDC) की मदद ली जाएगी, जो आधुनिक तकनीक के माध्यम से बीमारी के मूल कारणों की पहचान करेगी। जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. सतिंदर वशिष्ठ ने बताया कि विभाग पूरी स्थिति पर सतर्कता बरत रहा है। तीन दिन पूर्व मृतका अर्शीदा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग विस्तृत मेडिकल बुलेटिन जारी कर स्थिति स्पष्ट करेगा।
मौतों के आंकड़ों पर विभाग और ग्रामीणों में टकराव
गांव में फैले हैपेटाइटिस (पीलिया) के कारण हो रही मौतों को लेकर स्वास्थ्य विभाग और ग्रामीणों के आंकड़ों में भारी अंतर है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक करीब 50 लोग बीमार हुए हैं और 8 लोगों की मौत हुई है। इसके विपरीत, ग्रामीणों का दावा है कि पिछले डेढ़ महीने में मरने वालों की संख्या 18 से 20 तक पहुंच चुकी है और 100 से अधिक लोग अभी भी बीमार हैं। हालांकि, गांव में तैनात डॉ. देवेंद्र कुमार का कहना है कि 2,000 लोगों की स्क्रीनिंग में से 40 में लक्षण मिले थे, जिनमें से 30 उपचार के बाद ठीक हो चुके हैं।
झोलाछाप डॉक्टरों पर FIR और सघन चेकिंग
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव में पक्का डेरा डाल दिया है और घर-घर जाकर ब्लड सैंपल लिए जा रहे हैं। मामूली लक्षण दिखने पर भी मरीजों का तुरंत उपचार शुरू किया जा रहा है। बीमारी के प्रकोप के बीच गांव में अवैध रूप से क्लीनिक चला रहे झोलाछाप डॉक्टरों पर भी कार्रवाई की गई है; अब तक पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। स्थानीय विधायक ने भी इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से त्वरित राहत की अपील की है।
जांच में जुटीं राष्ट्रीय स्तर की टीमें
बीमारी के सही कारणों का पता लगाने के लिए केवल जिला स्तर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की संस्थाएं भी जुटी हुई हैं। सीएमओ के अनुसार, आईसीएमआर (ICMR), एनआईवी पुणे, दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल और नूंह मेडिकल कॉलेज की टीमें अपने स्तर पर सैंपल की जांच कर रही हैं। हालांकि स्थानीय स्तर पर 'एनर्जी ड्रिंक' को भी मौतों का एक संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग पोस्टमार्टम रिपोर्ट और लैब नतीजों के बिना इसकी पुष्टि करने से बच रहा है।

