मंत्रियों के क्षेत्रों में भी हारी भाजपा, बनेगा रिपोर्ट कार्ड

मंत्रियों के क्षेत्रों में भी हारी भाजपा, बनेगा रिपोर्ट कार्ड

ट्रिब्यून न्यूज सर्विस

चंडीगढ़, 23 जून

हरियाणा में सत्ताधारी भाजपा-जजपा गठबंधन निकाय चुनावों में जीत का जश्न मना रहा है। हालांकि सरकार को अंदरखाने इसकी समीक्षा भी करनी होगी कि गठबंधन उम्मीदवारों को उन शहरों में भी हार का मुंह देखना पड़ा है, जिनका प्रतिनिधित्व मंत्री और विधायक कर रहे हैं। माना जा रहा है कि ऐसे जिन शहरों में हार हुई है, उन्हें लेकर दोनों पार्टियां समीक्षा करेंगी।

मंत्रियों व विधायकों का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी तैयार हो सकता है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस तो यह कहकर पल्ला झाड़ चुका है कि उसने निकायों के चुनाव सिम्बल पर लड़े ही नहीं। मगर भाजपा के तो अधिकांश मंत्री, सांसद, विधायक व वरिष्ठ नेता नगर परिषद व नगर पालिकाओं के चुनावों में डटे हुए थे। स्थिति यह भी रही कि एक-एक शहर में कई-कई मंत्रियों के दौरे भी करवाए गए। खुद सीएम मनोहर लाल खट्टर के हलके करनाल में चार निकायों में से तीन पर भाजपा को शिकस्त मिली है।

करनाल जिले की चार नगर पालिकाओं – असंध, घरौंडा, निसिंग व तरावड़ी में चुनाव हुए। घरौंडा में तो स्थानीय विधायक हरविंद्र सिंह कल्याण पार्टी की लाज बचाने में कामयाब रहे। हालांकि घरौंडा में आम आदमी पार्टी के सुरेंद्र सिंह द्वारा भाजपा उम्मीदवार हैप्पी गुप्ता को दी कड़ी टक्कर आने वाले दिनों में मुश्किलें भी खड़ी कर सकती है। भाजपा प्रत्याशी ने 5108 वोट लेकर यह चुनाव जीता। वहीं आप को यहां से 5077 वोट मिले।

इसी तरह से तरावड़ी में भाजपा के राजीव नारंग को निर्दलीय प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह उर्फ बिल्ला ने चुनाव में पटकनी दी। निसिंग में तो भाजपा उम्मीदवार तीसरे नंबर पर पहुंच गया। निर्दलीय रोमी सिंगला ने 4473 वोट लेकर यह चुनाव जीता। दूसरे नंबर पर भी निर्दलीय प्रत्याशी जनक राज रहे। उन्हें 2173 मत हासिल हुए। असंध में निर्दलीय सतीश कटारिया ने 4408 वोट लेकर अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। भाजपा प्रत्याशी कमलजीत लाडी को 3855 वोट मिले।

सहकारिता मंत्री डॉ़ बनवारी लाल खुद बावल शहर में पार्टी प्रत्याशी को चुनाव नहीं जितवा सके। स्थिति यह रही कि भाजपा उम्मीदवार यहां तीसरे नंबर पर रहा। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ओमप्रकाश यादव नारनौल से विधायक हैं। नारनौल नगर परिषद में भाजपा प्रत्याशी संगीता को महज 13 हजार 68 वोट मिले। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार कमलेश सैनी ने 27 हजार 202 वोट लेकर चेयरमैनी का चुनाव जीता।

कमलेश सैनी जजपा की राष्ट्रीय सचिव रह चुकी हैं और चुनाव जीतने के बाद उन्होंने दुष्यंत चौटाला से मुलाकात करके जजपा में फिर से आस्था भी जता दी। रानियां से निर्दलीय विधायक व बिजली मंत्री चौ़ रणजीत सिंह दीपक गाबा का समर्थन कर रहे थे। गाबा को निर्दलीय उम्मीदवार मनोज सचदेवा ने चुनाव हराया। मनोज की गिनती इनेलो समर्थकों में होती है। ऐलनाबाद से भाजपा टिकट पर उपचुनाव लड़ चुके गोबिंद कांडा रानियां से भी 2019 का चुनाव लड़ चुके हैं। वे भी गाबा के लिए मेहनत कर रहे थे लेकिन परिणाम नहीं मिले। इसी तरह से उपमुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह चौटाला के उचाना नगर पालिका में भी जजपा प्रत्याशी की बुरी हार हुई। यहां जजपा तीसरे नंबर पर रही। विकास एवं पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली टोहाना से विधायक हैं। यहां भी जजपा ने चुनाव लड़ा था, पर निर्दलीय प्रत्याशी के हाथों जजपा को हार मिली।

इन विधायकों के हलकों में हारी पार्टी

हांसी में विनोद भ्याना भाजपा विधायक हैं। यहां से पार्टी की मीनू को 14 हजार 923 वोट मिले। वहीं निर्दलीय प्रवीन ऐलावादी ने 20 हजार 428 वोट लेकर जीत हासिल की। होडल में तो भाजपा का प्रदर्शन सबसे शर्मनाक रहा। यहां से भाजपा विधायक जगदीश नैय्यर पार्टी को पांचवीं पॉजिशन पर पहुंचने से भी नहीं रोक पाए। भाजपा उम्मीदवार लखन लाल को 4198 वोट मिले। निर्दलीय इंद्रेश ने 9629 वोट लेकर उन्हें पटकनी दी। रतिया से विधायक लक्ष्मण नापा पार्टी उम्मीदवार अंजु बाला को नहीं जितवा सके। यहां निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति खन्ना ने 7290 वोट हासिल किए। भाजपा उम्मीदवार को केवल 2556 वोट से सब्र करना पड़ा।

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