'अपने ही पैसे वापस लेने के लिए आंदोलन कर रहे आंगनवाड़ी वर्कर'
3 साल से आंगनवाड़ी चलाने के लिए जेब से पैसे खर्च कर रहे हैं वर्कर
आंगनवाड़ी सरकार से अपने द्वारा सरकारी कार्यों के लिए खर्च किए गए पैसे वापस मांगने के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं। पिछले तीन वर्षों में इन आंगनवाड़ी वर्कों ने अपने परिवार के खर्च कम करके अपने जेब से आंगनवाड़ी को चलाने के लिए गैस सिलेंडर का इंतजाम किया, आंगनवाड़ी कम क्रैश सेंटर का किराया दिया, आंगनवाड़ी केंद्र में सामान लेकर आए। लगातार अपने जेब से पैसा खर्चने के बाद सरकार को बिल भेजे गए, बिल अभी जिला व ब्लॉक कार्यालय में धक्के खा रहे हैं। अधिकारी उन्हें बार-बार आश्वासन दे रहे हैं कि पैसा मुख्यालय से आएगा, आपके खातों में डलेगा।
आंगनवाड़ी यूनियन कर्मचारी नेताओं का कहना है कि अभी तक अधिकारियों ने मुख्यालय में बिल ही नहीं भेजे तो भुगतान कहां से होगा। आंगनवाड़ी यूनियन कर्मचारी नेता कमलेश एवं रीता कत्याल ने बताया कि पिछले दो हफ्तों से अधिकारी यमुनानगर में ही एक से दूसरे कार्यालय में जिम्मेवारी डालकर अपनी जिम्मेवारी से बचने का प्रयास करते रहे हैं। जब हमने मुख्यालय में पता किया तो पता चला कि यहां किसी तरह के कोई बिल पेंडिंग नहीं है। कर्मचारी यूनियन नेताओं का कहना है कि अधिकारी उन्हें गुमराह कर रहे हैं, जो पैसा वह अपने परिवार का पेट काटकर अपनी जेब से सरकारी कार्यों के लिए खर्च करते आए हैं, उस पैसे का उन्हें भुगतान तुरंत होना चाहिए। आंगनवाड़ी वर्कर, हेल्पर यूनियन का धरना आज भी जारी रहा। आज का धरना जगाधरी शहरी की प्रधान सुनीता की अध्यक्षता में किया गया। उन्होंने कहा कि अपने ही द्वारा सरकार के लिए खर्च किए गए पैसों के लिए संघर्ष करते हुए आंगनवाड़ी वर्करों को पूरा एक महीना हो गया, लेकिन विभाग की ओर से अभी तक यह नहीं बताया गया कि उनकी जो राशि विभाग की तरफ बकाया है, वह कब तक उनके खातों में आ जाएगी। धरने में रेखा, शीतल, मीनाक्षी, सुमन, अंजू, पालो, कुसम, गीता, हर्ष, अनिता, नसरीन, सुनीता, रजनी, माधुरी, सीमा, रेनू, नेहा, पूजा, सरोज, शालिनी, रितु गुप्ता आदि सहित सैकड़ों वर्कर उपस्थित रहीं।

