कृषि विश्वविद्यालय ने मैदान में उतारा ई-ट्रैक्टर, एक बार की चार्जिंग में चलेगा 80 किलोमीटर

किसानों को होगा फायदा डीजल के मुकाबले पड़ेगा सस्ता

कृषि विश्वविद्यालय ने मैदान में उतारा ई-ट्रैक्टर, एक बार की चार्जिंग में चलेगा 80 किलोमीटर

हिसार में रविवार को हकृवि के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किये ई-ट्रैक्टर को चलाते कुलपति बीआर काम्बोज। -निस

नरेंद्र ख्यालिया/निस

हिसार, 17 अक्तूबर

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (सीसीएसएचएयू) के वैज्ञानिकों ने ई-ट्रैक्टर विकसित किया है। इस ई-ट्रैक्टर की बैटरी 9 घंटे में फुल चार्ज हो जाएगी और इसमें ट्रैक्टर 80 किलोमीटर की दूरी तय कर सकेगा। इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पर अनुसंधान करने वाला हकृवि पहला कृषि विश्वविद्यालय बन गया है। विश्वविद्यालय के कृषि इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कॉलेज ने ई-ट्रैक्टर को तैयार किया है। ट्रैक्टर की लांचिंग के अवसर पर पूर्व निदेशक केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान बुदनी के पूर्व निदेशक एमएल मेहता, बैटरी चालित ट्रैक्टर के निर्माता विकास गोयल, डॉ. अमरजीत कालरा डीन इंजीनियरिंग कॉलेज, डॉ. एसकेसहरावत निदेशक अनुसंधान सहित अन्य वैज्ञानिक उपस्थित थे। ई ट्रैक्टर के संचालन की लागत के हिसाब से बात की जाए तो यह डीजल ट्रैक्टर के मुकाबले में 32 प्रतिशत और 25.72 प्रतिशत तक सस्ता है। ट्रैक्टर में कंपन और शोर की बात की जाए तो इसमें 52 प्रतिशत कम्पन और 20.52 प्रतिशत शोर बीआईएस कोड की अधिकतम अनुमेय सीमा से कम पाया गया। इसमें इंजन न होने के कारण गर्मी भी नहीं लगती।

किसानों के लिए होगा लाभकारी

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने कहा कि यह ई-ट्रैक्टर 23.17 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चल सकता है। यह ट्रैक्टर किसानों के लिए बहुत ही किफायती होगा। उन्होंने वैज्ञानिकों की इस नई खोज की प्रशंसा की और भविष्य में इसी प्रकार किसान हितैषी अनुसंधान करने पर जोर दिया।

ये हैं विशेषताएं

16.2 किलोवाट आवर की लिथियम आयन बैटरी का इस्तेमाल किया गया। बैटरी को 9 घंटे में फुल चार्ज किया जा सकेगा। जिससे 19 से 20 यूनिट बिजली की खपत होती है। इतना ही नहीं, ई-ट्रैक्टर 1.5 टन वजन के ट्रेलर के साथ 80 किलोमीटर तक का सफर कर सकता है। जिसमें फास्ट चार्जिंग का भी विकल्प उपलब्ध है, जिसकी मदद से ट्रैक्टर की बैटरी महज 4 घंटे में चार्ज कर सकते हैं। इस ट्रैक्टर में शानदार 77 प्रतिशत का ड्राबार पुल है। किसानों को सस्ता पड़ेगा। इसका डिजाइन काफी अच्छा है। चलाने में किसानों को काफी आराम देगा।

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