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Agniveer Job : पहले अग्निवीर बैच के लिए ‘लैंडिंग प्लान’ तैयार: हरियाणा ने बिछाया नौकरियों का रेड कार्पेट

जुलाई 2026 में घर वापसी से पहले ही नौकरी; सरकार ने बनाई ‘स्मूद ट्रांजिशन’ की रणनीति, पहले बैच में होंगे 1300 से अधिक अग्निवीर

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Agniveer Job : सेना से लौटने वाले अग्निवीरों के लिए सबसे बड़ा सवाल हमेशा यही रहा है कि चार साल बाद आगे क्या! हरियाणा ने इसी सवाल का जवाब पहले ही तैयार कर लिया है। जुलाई 2026 में वापस आने वाले पहले बैच के लिए राज्य सरकार ने एक विस्तृत ‘लैंडिंग प्लान’ तैयार किया है, ताकि वर्दी से नागरिक जीवन में उनका बदलाव बिना किसी झटके के हो सके।

अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों में से 75 प्रतिशत को चार साल बाद सेना से बाहर आना होगा। हरियाणा से बड़ी संख्या में युवा इस योजना में शामिल हुए हैं, और पहले बैच में करीब 1,373 अग्निवीर राज्य में लौटेंगे। सरकार का फोकस अब इस पर है कि इन युवाओं को सीधे रोजगार या स्वरोजगार से जोड़ा जाए, ताकि उनकी ट्रेनिंग और अनुशासन का बेहतर इस्तेमाल हो सके।

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राव नरबीर सिंह, सैनिक एवं अर्द्ध-सैनिक कल्याण मामले मंत्री
राव नरबीर सिंह, सैनिक एवं अर्द्ध-सैनिक कल्याण मामले मंत्री

सरकारी सेक्टर में ‘रेडी एंट्री’ का खाका

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राज्य सरकार ने पुलिस, जेल, वन विभाग, खनन एवं भूविज्ञान और अन्य सुरक्षा व सेवा क्षेत्रों में पूर्व अग्निवीरों के लिए विशेष अवसर तय किए हैं। इन विभागों में उनकी स्किल्स और ट्रेनिंग के हिसाब से उन्हें प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई गई है, ताकि भर्ती प्रक्रिया में उन्हें सीधा लाभ मिल सके।

नौकरी के साथ-साथ ‘सेफ्टी नेट’ भी

चार साल की सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों को लगभग 11.71 लाख रुपये का सेवा निधि पैकेज मिलेगा, जो उनके नए जीवन की शुरुआत का आधार बनेगा। इसके साथ ही राज्य सरकार इस रकम को केवल ‘एग्जिट पैकेज’ नहीं, बल्कि ‘स्टार्टिंग कैपिटल’ के रूप में उपयोग कराने की दिशा में काम कर रही है।

यूनिफॉर्म के बाद उद्यमिता की राह

हर अग्निवीर सरकारी नौकरी ही चुने, यह जरूरी नहीं। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्वरोजगार को भी योजना का अहम हिस्सा बनाया है। तीन साल तक 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण देने की व्यवस्था की जा रही है, जिससे युवा अपना बिजनेस शुरू कर सकें या किसी स्टार्टअप से जुड़ सकें।

संस्थागत ढांचे पर भी काम जारी

आने वाले समय में ‘हरियाणा सैनिक एवं अर्द्ध-सैनिक कल्याण निगम’ की स्थापना की तैयारी चल रही है। यह संस्था न केवल अग्निवीरों, बल्कि पूर्व सैनिकों के लिए भी रोजगार, पुनर्वास और स्किल मैपिंग का केंद्र बनेगी। इससे पूरी प्रक्रिया को संगठित और दीर्घकालिक आधार मिलेगा।

ट्रांजिशन को आसान बनाने पर फोकस

सरकार की रणनीति का मूल उद्देश्य यह है कि सेना से नागरिक जीवन में आने वाला बदलाव सहज और सम्मानजनक हो। इसके लिए केवल नौकरी ही नहीं, बल्कि काउंसलिंग, स्किल कनेक्ट और सेक्टर-वाइज प्लेसमेंट जैसे पहलुओं पर भी काम किया जा रहा है।

राज्य सरकार का लक्ष्य अग्निवीरों को सेवा के बाद अनिश्चितता में छोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य देना है। जुलाई 2026 में लौटने वाले पहले बैच के लिए पहले से ही व्यापक योजना तैयार है, जिसमें सरकारी नौकरियों के अवसर, स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता और संस्थागत समर्थन शामिल है। हरियाणा, देश में ऐसा मॉडल विकसित कर रहा है, जहां अग्निवीरों का अनुभव राज्य की ताकत बनेगा।

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