विधानसभा में आदित्य सुरजेवाला ने जन विश्वास बिल पर साधा निशाना
अवैध खनन को लेकर पर्यावरण और स्वास्थ्य सुरक्षा पर उठाये गंभीर सवाल
हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पारित हरियाणा जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) बिल- 2025 की कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने कड़ी आलोचना की। सुरजेवाला ने सदन में अपने अभिभाषण में बिल को जन विश्वासघात करार देते हुए कहा कि कारोबार आसान करने के नाम पर पर्यावरण और जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। आदित्य सुरजेवाला ने विशेष रूप से दो संशोधनों पर आपत्ति जताई।
स्टोन क्रशर कानून में संशोधन : उन्होंने कहा कि स्टोन क्रशर कानून में बिल की शेड्यूल 25 में हरियाणा रेगुलेशन एंड कंट्रोल ऑफ क्रशर्स एक्ट, 1991 की धारा 12 में संशोधन प्रस्तावित है, जिससे अवैध स्टोन क्रशिंग के लिए जेल की सजा हटाकर केवल 2-4 लाख रुपये का जुर्माना रह जाएगा। सुरजेवाला ने इसे अवैध स्टोन क्रशर माफिया को ग्रीन सिग्नल बताया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन अरावली पहाड़ियों को खोखला करने वालों को करोड़ों कमाने की छूट देगा। 'प्रदूषण पहले करो, बाद में पेनल्टी दो' यह नीति पूरे इकोसिस्टम को तबाह कर देगी। आदित्य सुरजेवाला ने वैकल्पिक संशोधन प्रस्तावित किया जिसमें पहली बार उल्लंघन पर केवल पेनल्टी, लेकिन दोबारा अपराध पर 5-10 लाख जुर्माना और 2 साल तक की जेल हो। साथ ही धारा 13 को हटाने का विरोध किया।
हेल्थकेयर कानून में बदलाव : शेड्यूल 37 में हरियाणा क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट, 2014 में फाइन को पेनल्टी से बदलने का प्रस्ताव है, जिससे अपराध को गैर-आपराधिक बना दिया जाएगा। सुरजेवाला ने इसे जीवन के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा, बिना रजिस्ट्रेशन के क्लिनिक चलाना या क्लोजर ऑर्डर के बाद भी संचालन जारी रखने पर अब केवल पेनल्टी से बच जाएगा। यह अस्पतालों को मौत का सौदागर बनाने की इजाजत है। उन्होंने धारा 36 और 37 में संशोधन का विरोध किया और प्रस्ताव रखा कि क्लोजर ऑर्डर तोड़ने पर 2 साल की जेल और 5 लाख जुर्माना तथा झूठी जानकारी देने पर भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमा चलाया जाए।
सुरजेवाला ने जोर देकर कहा कि उनके संशोधन कारोबार-विरोधी नहीं, बल्कि अपराध और असंवेदनशीलता के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि जन विश्वास का मतलब जनता का भरोसा है कि सरकार पहाड़ों को नहीं बिकने देगी और अस्पतालों को मौत का धंधा नहीं बनने देगी।

