आरक्षित वर्गों में भी सैकड़ों पद खाली छोड़ने का आरोप, हुड्डा बोले- भर्तियां लटकाने और पद खाली छोड़ने की नीति बना चुकी है सरकार
हुड्डा ने कहा - पीजीटी कंप्यूटर साइंस भर्ती में 1711 पदों के मुकाबले सिर्फ 1101 अभ्यर्थियों को किया क्वालीफाई, कई पुरानी भर्तियों के आंकड़े गिनाए
Haryana Politics : नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) और भाजपा सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में सरकारी भर्तियां युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें वर्षों तक इंतजार करवाने और अंत में पद खाली छोड़ने का माध्यम बन गई हैं।
उन्होंने कहा कि आयोग की कार्यप्रणाली को देखकर ऐसा लगता है मानो सरकार ने उसे स्पष्ट संदेश दे रखा है कि भर्ती प्रक्रिया में ऐसी खामियां छोड़ी जाएं, जिससे नौकरियां समय पर पूरी न हों और हजारों पद रिक्त ही रह जाएं। हुड्डा ने कहा कि पेपर लीक, प्रश्नपत्र की कॉपी, गलत प्रश्न, गलत उत्तर और भर्ती परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाली अनियमितताएं अब अपवाद नहीं बल्कि एक तयशुदा पैटर्न बन चुकी हैं।
उनका आरोप है कि वर्षों तक भर्ती प्रक्रियाओं को उलझाकर रखा जाता है और जब परिणाम घोषित किए जाते हैं तो उन्हें इस तरह तैयार किया जाता है कि बड़ी संख्या में पद भर ही नहीं पाते। उन्होंने हाल ही में घोषित पीजीटी कंप्यूटर साइंस भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2019 में 1711 पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। करीब सात साल बाद जब भर्ती अंतिम चरण तक पहुंची तो आयोग ने 5100 अभ्यर्थियों में से केवल 1101 को ही क्वालीफाई किया। उनका कहना था कि इससे 600 से अधिक पद खाली रहने की पूरी संभावना बन गई है।
हुड्डा ने कहा कि सबसे अधिक नुकसान आरक्षित वर्गों को हुआ है। उनके अनुसार अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के 342 पदों के मुकाबले केवल 53 अभ्यर्थियों का चयन संभव है, यानी 289 पद रिक्त रह जाएंगे। इसी प्रकार बीसी-ए के 171 पदों में केवल 105 अभ्यर्थी चयन की दौड़ में हैं, जबकि 66 पद खाली रह सकते हैं। ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 171 पदों के मुकाबले केवल 62 अभ्यर्थियों का विस्तृत परिणाम जारी किया गया है, जिससे यहां भी 100 से अधिक पद रिक्त रहने की संभावना है।
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का भी दिया उदाहरण
हुड्डा ने कहा कि असिस्टेंट प्रोफेसर (इंग्लिश) भर्ती में 613 पदों के मुकाबले केवल 151 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जबकि शेष पद खाली छोड़ दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएससी वर्ग की 60 आरक्षित सीटों में से केवल एक उम्मीदवार का चयन किया गया और 35 प्रतिशत पात्रता शर्त का हवाला देकर बाकी सीटें रिक्त छोड़ दी गईं। उन्होंने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सरकार की 11 नवंबर, 2022 की गाइडलाइन के कुछ प्रावधान यूजीसी-2018 की गाइडलाइन के क्लॉज-4, 5 और 6 के अनुरूप नहीं हैं। हुड्डा ने दावा किया कि इससे यह स्पष्ट होता है कि भर्ती प्रक्रिया के लिए बनाए गए नियम ही विवादित रहे हैं।
बाहरी अभ्यर्थियों को दी गई प्राथमिकता
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि अनेक भर्तियों में हरियाणा के युवाओं की कीमत पर दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि हरियाणा पावर यूटिलिटीज की असिस्टेंट इंजीनियर (एई/एसडीओ) भर्ती में दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाए गए 214 अभ्यर्थियों में केवल 29 हरियाणा के थे। सिंचाई विभाग में 49 चयनित उम्मीदवारों में से 28 अन्य राज्यों के थे। एसडीओ इलेक्ट्रिकल भर्ती में 80 में से 78 तथा तकनीकी शिक्षा विभाग में लेक्चरर भर्ती में 153 में से 106 उम्मीदवार हरियाणा से बाहर के थे। उन्होंने विकास एवं पंचायत विभाग में एसडीई (सिविल) भर्ती, बीडीपीओ भर्ती, लेक्चरर ग्रुप-बी, असिस्टेंट प्रोफेसर (पॉलिटिकल साइंस) तथा कृषि विभाग के एडीओ पदों की भर्तियों का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि इन सभी में हरियाणा के युवाओं के साथ न्याय नहीं हुआ।

