तू राजा की राजकुमारी... पाणी आली पाणी प्यादे... गीतों से महावीर गुड्डू ने बांधा समां
सूरजकुंड शिल्प मेला : मुख्य चौपाल पर सांस्कृतिक संध्या का आयोजन
तू राजा की राजकुमारी, मैं सिर्फ लंगोटे आला सूं, भांग रगड़ कै पीया करूं कुंडी सौटे आला सूं, पाणी आली पाणी प्यादे आदि गीतों की सुरीली सांझ में देर शाम सूरजकुंड शिल्प मेला परिसर गुंजायमान हो गया। 39वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड आत्मनिर्भर शिल्प मेले की चौपाल पर जब पद्मश्री अवार्डी विख्यात आर्टिस्ट महावीर गुड्ड ने उक्त गीतों की प्रस्तुति दी तो पूरा मेला परिसर हरियाणवी सांस्कृति से सराबोर हो गया। पद्मश्री महावीर गुड्डू और उनकी टीम ने बड़ी चौपाल पर हरियाणवी संस्कृति पर आधारित गायकी से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। उन्होंने बिना किसी अंतराल के दो घंटे से भी अधिक समय तक निरंतर प्रस्तुतियां दी। इस कार्यक्रम में सहकलाकार अनु ने हरियाणवी गीत राम के थे, राम के हैं और राम के रहेंगे की शानदार प्रस्तुति दी।
वहीं गायक विक्रम सिरोहीवाल ने हिंदी और फिल्मी बॉलीवुड बैंड की मधुर प्रस्तुति दी। उन्होंने तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी, मोहब्बत की राहों में आ कर तो देखो, तड़पने पे मेरे न फिर तुम हंसोगे, कभी दिल किसी से लगा कर तो देखो जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति दी, जिस पर दर्शकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ कलाकार का उत्साहवर्धन किया।
इसके अतिरिक्त पाली नाथ बीन पार्टी, रिंकू डेरु पार्टी की लोक प्रस्तुति ने ग्रामीण लोक संस्कृति की झलक पेश की। सतीश हरियाणवी ने हास्य कलाकार के रूप में दर्शकों को खूब हंसाया। साथ ही कलाकार अंजली भाटी एवं सह कलाकारों द्वारा हरियाणवी सांस्कृतिक लोक नृत्य तथा डॉ. अमरजीत कौर व कलाकारों द्वारा शास्त्रीय लोक नृत्य की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक विविधता को मंच पर जीवंत कर दिया। नाट्य कला के अंतर्गत शत्रुघ्न नागर एवं एसडी नागर पार्टी द्वारा प्रस्तुत श्राप नाटक ने सामाजिक संदेश के साथ गहराई से सोचने पर मजबूर किया।
हरियाणा अपना घर के बाहर हरियाणवी पगड़ी का पंडाल पगड़ी बंधाओ, फोटो खिंचाओ पर्यटकों को अपनी ओर लुभा रहा है। महिलाएं अपना घर में रखी चक्की चला-चलाकर अतीत की यादों को संजोकर सेल्फी के माध्यम से कैमरे में कैद कर रही हैं। इसके साथ अनाज कूटने के लिए रखा गया ओखल एवं मूसल भी शहरी महिलाओं के लिए सेल्फी प्वाइंट के रूप में खूब लोकप्रियता हासिल कर रहा है। साथ ही विरासत-ए-हेरिटेज हरियाणा में प्रदर्शित किए गए हरियाणा का लोक पारंपरिक क्राफ्ट भी पर्यटकों के लिए सेल्फी प्वाइंट के रूप में लोकप्रिय हो रहा है।
मेले में हरियाणवी पगड़ी का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। यहां आने वाले पर्यटक पारंपरिक पगड़ी पहनकर फोटो और सेल्फी ले रहे हैं तथा हरियाणवी संस्कृति का अनूठा अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।
मेले में नारियल के रेशों से बने आकर्षक घोंसले, कलाकृतियां और हस्तशिल्प उत्पाद मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पंचकूला से आए शिल्पकार अमर सिंह द्वारा स्टॉल नंबर 196 पर नारियल के रेशों और खोल से तैयार घोंसले लाए गए है। ये पर्यावरण-अनुकूल घोंसले पर्यटकों द्वारा काफी पसंद किए जा रहे हैं।
शिल्पकार अमर सिंह ने बताया कि नारियल के खोल का उपयोग कर बनाए गए ये घोंसले न केवल सजावटी हैं, बल्कि चिडिय़ों के लिए एक सुरक्षित घर भी हैं। विशेष रूप से पक्षियों के लिए बनाए गए ये घोंसले शहरी क्षेत्रों में प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद बने हुए हैं। नारियल के खोल से बने ये घोंसले सजावट के साथ-साथ चिडिय़ों के लिए एक सुरक्षित और प्राकृतिक घर भी प्रदान करते हैं।

