प्रथम नवरात्र पर बृहस्पतिवार को सिद्ध पीठ बाबा जहरगिरी आश्रम में धार्मिक आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस पावन मौके पर श्री महंत डॉक्टर अशोक गिरी महाराज के सान्निध्य में मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री देवी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं स्तुति की गई। इस दौरान महंत डॉक्टर अशोक गिरी महाराज ने श्रद्धालुओं को नवरात्र के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि नवरात्र केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि मां शैलपुत्री की उपासना से जीवन में स्थिरता, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने बताया कि आश्रम में नौ दिनों तक चलने वाली अखण्ड पूजा-अर्चना और अखण्ड ज्योति पूजन का शुभारंभ भी विधिवत किया गया। अखंड ज्योति के प्रज्ज्वलित होते ही पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
महंत डॉक्टर अशोक गिरी महाराज ने बताया कि शैलपुत्री देवी माता दुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं। वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं, इसलिए इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र और हाथों में त्रिशूल व कमल शोभा देते हैं। नवरात्र के पहले दिन इनकी पूजा करने से जीवन में स्थिरता, शक्ति और साहस मिलता है। माता शैलपुत्री की कृपा से सभी कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति प्राप्त होती है। पूरे नवरात्र पर्व के दौरान प्रतिदिन अलग देवी स्वरूपों की पूजा की जाएगी और श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि वे नवरात्र के इन पावन दिनों में अधिक से अधिक समय पूजा, साधना और सेवा में लगाएं।

