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मनरेगा कानून को समाप्त करने का विरोध, महिला मजदूरों ने किया प्रदर्शन

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की जिला कमेटी द्वारा ढ़ाणा नरसान गांव में मनरेगा मजदूरों की एक सभा आयोजित की गई, जिसमें अधिकांश महिला मजदूरों ने भाग लिया। सभा की अध्यक्षता मनरेगा मजदूर सुलोचना ने की। माकपा के जिला सचिव कामरेड...

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भिवानी के गांव ढ़ाणा नरसान में प्रदर्शन करतीं महिला मनरेगा मजदूर। -हप्र
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मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की जिला कमेटी द्वारा ढ़ाणा नरसान गांव में मनरेगा मजदूरों की एक सभा आयोजित की गई, जिसमें अधिकांश महिला मजदूरों ने भाग लिया। सभा की अध्यक्षता मनरेगा मजदूर सुलोचना ने की। माकपा के जिला सचिव कामरेड ओम प्रकाश ने कहा कि जून 2025 में ढ़ाणा नरसान और धिराना के 40 मजदूरों ने रजबाहे की सफाई की थी, जिसमें अधिकांश महिलाएं शामिल थीं। हालांकि, उन्हें अब तक उस काम का भुगतान नहीं किया गया है।

कामरेड ओम प्रकाश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर मनरेगा को एक योजना (स्कीम) में परिवर्तित कर दिया, जिससे 40 प्रतिशत वित्तीय जिम्मेदारी राज्यों पर डाल दी गई है। इस कदम से मनरेगा की कानूनी गारंटी कमजोर हो गई है। उन्होंने केंद्र सरकार के इस निर्णय की आलोचना करते हुए मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और मजदूरों को उनका हक दिया जाए।

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माकपा ने आगामी 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है, जिसमें वे पुराने श्रम कानूनों और मनरेगा कानून को पुनः बहाल करने की मांग करेंगे।

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इस अवसर पर किसान नेता महाबीर फौजी, कृष्णा, सन्तरा, ओमपति, बनारसी, प्रवीण, जगमति, मंजू, केला, बसंती, उषा, कमलेश, सनिता व बतवान शामिल रहे।

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