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जब रसोई खामोश हो जाती है, तो परिवार बिखरने लगता है : बोधराज सीकरी

पंजाबी बिरादरी महासंगठन गुरुग्राम के प्रधान ने की महिलाओं व बच्चों के कार्यक्रम में शिरकत

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बोधराज सीकरी
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जब रसोई खामोश हो जाती है, तो परिवार बिखरने लगता है. क्या आपने कभी सोचा था कि एक शांत रसोई किसी देश का भविष्य बदल सकती है? यह अमेरिका में हुआ था और अगर हम समय रहते सबक नहीं सीखते हैं तो भारत में भी ऐसा हो सकता है।

1970 के दशक में अमेरिका कैसा दिखता था - दादा-दादी, माता-पिता और बच्चे एक साथ रहते थे। हर शाम, परिवार डाइनिंग टेबल पर घर का बना खाना खाते थे। भोजन केवल पोषण नहीं था - यह बंधन और साझा मूल्यों का स्रोत था। यह परिवार को एक सूत्र में बांधने का साधन था।

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यह महत्वपूर्ण बात आज पंजाबी बिरादरी महासंगठन गुरुग्राम के प्रधान बोधराज सीकरी ने महिलाओं और बच्चों के एक कार्यक्रम में कहीं। शहर के कई मंदिरों का संचालन और सामाजिक संगठनों की अगुवाई कर रहे बोधराज सीकरी ने कहा कि 1980 के दशक के बाद: सांस्कृतिक बदलाव:- फास्ट फूड, टेक-अवे और रेस्टोरेंट संस्कृति के उदय ने घर के बने खाने की जगह ले ली। माता-पिता काम में बहुत व्यस्त हो गए, बच्चे पिज्जा, बर्गर और प्रोसेस्ड फ़ूड की ओर मुड़ गए। दादा-दादी की आवाज़ें धीमी पड़ गईं, पारिवारिक बंधन कमज़ोर पड़ गए और बच्चा अकेल पड़ गया।

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अमेरिका में पारंपरिक पारिवारिक जीवन का पतन : 1971 में, 71 प्रतिशत अमेरिकी घरों में पारंपरिक परिवार (माता-पिता और बच्चे) थे। आज, यह संख्या केवल 20 प्रतिशत है। क्या बचा है? वृद्धाश्रमों में बुज़ुर्ग, किराए के फ्लैटों में अकेले युवा, टूटती शादियां, अकेलेपन से जूझते बच्चे। अमेरिका में तलाक की दरें : पहली शादी के लिए 50 प्रतिशत, दूसरी शादी के लिए 67 प्रतिशत, तीसरी शादी के लिए 74 प्रतिशत। यह सिर्फ़ एक संयोग नहीं है - यह एक शांत रसोई की कीमत है : घर का बना खाना अमृत होता है। मां का स्पर्श, दादाजी की बुद्धिमत्ता, दादी मां की कहानियां और साथ में खाने का जादू, लेकिन अब खाना स्विगी और ज़ोमैटो से आता है। रसोई खत्म हो जाती है, और घर सिर्फ़ एक मकान बन जाता है, घर-परिवार नहीं।

सीकरी बोले-स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव : अमेरिका में फास्ट फूड की लत के कारण मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग प्रारंभ हुआ। हेल्थ केयर उद्योग इस रोके जा सकने वाली गिरावट पर फल-फूल रहा है। लेकिन अभी भी देर नहीं हुई है, हम अभी भी अपनी ‘रसोई’ को फिर से ‘जीवंत’ कर सकते हैं। जापान में लोग अभी भी साथ मिलकर खाना बनाते और खाते हैं और वे सबसे लंबे समय तक जीवित रहते हैं। हमारी संस्कृतियों में भोजन पवित्र है और रिश्ते भी।

उन्होंने कहा कि बाहर के खाने पर बढ़ती निर्भरता को कम करें, परिवार के साथ भोजन करने के समय में कमी को दूर करें, बढ़ता अकेलापन और स्वास्थ्य संबंधी विकार का निराकरण अभी करें।

उन्होंने कहा कि आज आप क्या कर सकते हैं, अपने रसोई के चूल्हे को फिर से जलाएं। खाना पकाएं, अपने परिवार को खाने की मेज पर बुलाएं, क्योंकि बेडरूम हमें आलसी बनाते हैं, लेकिन रसोई परिवार बनाती है।

उन्होंने कहा कि क्या आप घर बनाना चाहते हैं या लॉज चलाना चाहते हैं? चुनाव आपका है, ‘खामोश रसोई’ का असर, जो दुनिया को प्रभावित कर रहा है। भारत इससे अलग नहीं रह सकता। कृपया विचार करें और अपने जीवन जीने के तरीके बदलें। आओ, ख़ामोश रसोई को पुनर्जीवित करें।

चेतावनियों की अनदेखी, दर्दनाक नतीजे

उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी ‘अगर आप अपनी रसोई संस्थाओं को और परिवार की देखभाल सरकारों को सौंप देंगे, तो परिवार बिखर जाएंगे।’ किसी ने नहीं सुना और भविष्यवाणियां सच साबित हुईं।

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