अनाज मंडियों में भीगा गेहूं, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
तेज बारिश से फसल रखरखाव व्यवस्था की खुली पोल
बरसात के बाद अनाज मंडी की हालत एक बार फिर बदहाल नजर आई, जहां किसानों की मेहनत पर पानी फिरता दिखा। मंडी के कई हिस्सों में जलभराव इतना अधिक था कि गेहूं पानी में तैरता हुआ दिखाई दिया। खुले आसमान के नीचे रखे गेहूं को बचाने के लिए तिरपाल से ढकने की कोशिश की गई, लेकिन लगातार बारिश और पानी भराव के कारण यह प्रयास भी नाकाम रहा। खासकर मंडी के निचले या झील क्षेत्र में सैकड़ों क्विंटल गेहूं बारिश के पानी में भीगकर खराब हो गया। मंडी के पूर्व प्रधान चांद बोडिया ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह समस्या हर साल सामने आती है, लेकिन प्रशासन इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाता। उन्होंने बताया कि शासन और प्रशासन दोनों से कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन समाधान नहीं हुआ। आढ़तियों और किसानों का कहना है कि वे पूरी तरह बर्बादी के कगार पर पहुंच चुके हैं। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री के एसीएस, मंत्री और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों तक यह मामला पहुंचाया गया, फिर भी समस्या की अनदेखी की गई। इस अवसर पर अन्य आढ़तियों ने भी आरोप लगाया कि कई बार ऊपरी स्तर से आदेश आने के बावजूद स्थानीय अधिकारी उन्हें गंभीरता से नहीं लेते। कुल मिलाकर, झज्जर अनाज मंडी में हालात ऐसे हैं कि किसान और आढ़ती हर तरफ से मार झेल रहे हैं और उनकी फसल के साथ-साथ उनकी उम्मीदें भी पानी में बहती नजर आ रही
नारनौल (हप्र) : बेमौसम बारिश ने किसानों पर कहर बरपा दिया है। मंगलवार रात तेज बारिश से खेतों और खलिहानों में पड़ी रबी फसल सरसों, गेहूं व चना भीगकर खराब हो गई। कई किसानों ने सरसों की कटाई कर फसल को खलिहानों में एकत्रित कर रखा था, लेकिन थ्रेसिंग से पहले ही बारिश ने उसे खराब कर दिया। गेहूं की कटाई के दौरान खेतों में पड़ी पूलियां भी भीग गईं, जिससे उनकी गुणवत्ता पर असर पड़ा है। चने की फसल को भी इस बेमौसम बारिश ने नुकसान पहुंचाया है। किसानों का कहना है कि इस बार रबी फसल अच्छी तैयार थी और वे इसे घर तक लाने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अचानक हुई बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। सरसों इस क्षेत्र की प्रमुख नकदी फसल है, जबकि गेहूं किसानों के परिवार के भरण-पोषण और पशुओं के चारे का मुख्य आधार है। बारिश के कारण फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है, जिससे किसानों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही है। इस संबंध में आल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के जिला सचिव डॉ. व्रतपाल सिंह व छाजूराम रावत ने बताया कि संगठन ने खेतों में जाकर नुकसान का जायजा लिया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों को इस संकट की घड़ी में राहत दी जाए और प्रति एकड़ 50 हजार रुपये के हिसाब से मुआवजा प्रदान किया जाए।
होडल (निस) : बुधवार दोपहर को हुई ओलावृष्टि व बरसात के कारण खुले आसमान के नीचे पड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ है। बुधवार दोपहर को अचानक आई बरसात व ओलावृष्टि के कारण पुरानी अनाज मंडी व 99 एकड़ अनाज मंडी में खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ अनाज भीग गया है । सरकारी एजेंसियों के द्वारा किसानों के गेहूं को खरीद लिया गया है, लेकिन इसका उठान नहीं हो पाने के कारण यह खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है । किसानों की इस कमाई के गेहूं को बचाने के लिए मार्केट कमेटी विभाग होडल द्वारा कोई भी इंतजाम नहीं किया हुआ था। किसानों का कहना है कि अनाज मंडी में गेहूं लाने पर मार्केट कमेटी द्वारा मार्केट फीस वसूली जाती है, जबकि किसानों को कोई सुविधा नहीं दी जाती है।
नूंह (निस) : एडीसी ज्योति ने बुधवार को पुन्हाना अनाज मंडी का निरीक्षण किया और फसल खरीद प्रक्रिया का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने किसानों को होने वाली समस्याओं के समाधान को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान एडीसी ज्योति ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि फसल खरीद के दौरान किसानों, व्यापारियों और आढ़तियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने बायोमीट्रिक गेट पास और ओटीपी से जुड़ी समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित करने को कहा। एडीसी ने बताया कि जिले की नूंह और पुन्हाना मंडी में 21 हजार मीट्रिक टन से अधिक फसल की आवक हो चुकी है, जिसमें से 50 प्रतिशत की खरीद भी की जा चुकी है। जिले में लगभग 90 प्रतिशत बायोमेट्रिक व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है और इसमें किसी बड़ी समस्या की सूचना नहीं है। फसल में नमी को लेकर कुछ विवाद सामने आए हैं, जिनके समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। आढ़तियों और व्यापारियों से अपील की गई कि वे किसानों को फसल की सफाई और सुखाने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि फसल की गुणवत्ता जांच किसानों के सामने ही की जा रही है, इसलिए सभी को इसमें सहयोग करना चाहिए।

