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Organ Donation : खुद बुझ गए मगर 13 घरों के चिरागों को दे गए नई लौ; पीजीआई रोहतक के इन 'देवदूतों' को सलाम

अंगदान की अमर गाथा : अपनों को खोने के असहनीय गम से ऊपर उठी इंसानियत, बिजेन्द्र और कुलदीप के परिवारों ने पेश की त्याग की ऐसी मिसाल जो आंखों में पानी भर दे

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पीजीआई में अंगदान करने वाले जेल वार्डन कुलदीप के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर अंतिम विदाई देते कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा। निस
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Organ Donation : कहते हैं कि इंसान खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही चला जाता है, लेकिन पीजीआईएमएस रोहतक में पिछले 72 घंटों के भीतर दो परिवारों ने इस धारणा को अपनी जीवटता से बदल दिया। अपने प्रियजनों को खोने के असहनीय दुख के बीच इन परिवारों ने अंगदान का जो साहसिक निर्णय लिया, उसकी बदौलत आज 13 लोग नई जिंदगी की सांसें ले रहे हैं। मानवता की यह अनुपम मिसाल भिवानी के बिजेन्द्र और सोनीपत के कुलदीप सिंह के परिजनों ने पेश की है, जिन्होंने दुनिया से विदा होते हुए भी दूसरों के जीवन में खुशियों के रंग भर दिए।

खाकी का 'अंतिम सलाम': अस्पताल की दहलीज पर फर्ज की पराकाष्ठा

सोनीपत के ताजपुर तिहाडा खुर्द निवासी 51 वर्षीय कुलदीप सिंह सुनारियां जेल में वार्डन के पद पर तैनात थे। करीब एक साल पहले हुए ब्रेन ऑपरेशन के बाद रविवार को अचानक उन्हें 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया गया। यह खबर परिवार के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं थी, लेकिन चिकित्सकों की काउंसलिंग के बाद शोक संतप्त परिवार ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने कुलदीप को सदा के लिए अमर कर दिया। सोमवार को उनके अंगदान से पांच मरीजों को नई संजीवनी मिली।

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इस भावुक क्षण पर कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने स्वयं पीजीआई पहुंचकर कुलदीप के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी। मंत्री ने कहा कि कुलदीप ने खाकी का फर्ज न केवल जीवित रहते हुए, बल्कि मृत्यु के पश्चात भी निभाया है।

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ग्रीन कॉरिडोर से मिली रफ्तार

अंगदान की इस जटिल प्रक्रिया को सफल बनाने में प्रशासन ने भी पूरी मुस्तैदी दिखाई। अंगों को न्यूनतम समय में जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने के लिए पुलिस ने विशेष 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाया। गौरतलब है कि कुलदीप से पहले भिवानी के जुई निवासी बिजेन्द्र के परिजनों ने भी उनके ब्रेन डेड होने पर अंगदान का फैसला कर मानवता का मान बढ़ाया था। चिकित्सकों के अनुसार, इन दो महादानियों के कारण हृदय, किडनी और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों का सफल प्रत्यारोपण हो सका, जिससे कई परिवारों के चिराग बुझने से बच गए।

सरकार का सहारा : 5 लाख की सहायता का ऐलान

जेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने वार्डन कुलदीप के परिवार के बलिदान को नमन करते हुए 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस बहादुर परिवार के साथ हर मोड़ पर खड़ी है। इस दौरान पीजीआई कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल सहित संस्थान के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम मौजूद रही, जिन्होंने इस सफल अंगदान को चिकित्सा जगत और मानवता के लिए एक बड़ी उपलब्धि करार दिया।

पीजीआई चंडीगढ़ : अंगदान में उत्तर भारत का सिरमौर

अंगदान के क्षेत्र में पीजीआई चंडीगढ़ (PGIMER) एक राष्ट्रीय मानक स्थापित कर चुका है। ताजे आंकड़ों के अनुसार:

  • किडनी ट्रांसप्लांट: संस्थान अब तक 5,400 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है। अकेले वर्ष 2025 में यहां 248 किडनी ट्रांसप्लांट हुए।

  • प्रतीक्षा समय में कमी: बेहतर प्रबंधन के कारण किडनी ट्रांसप्लांट के लिए प्रतीक्षा समय 12 महीने से घटकर अब मात्र 3 महीने रह गया है।

  • राष्ट्रीय रैंकिंग: पीजीआई चंडीगढ़ देश में अहमदाबाद के बाद दूसरे स्थान पर है। यहाँ अगस्त से नवंबर 2024 के बीच ही 97 सफल प्रत्यारोपण किए गए।

अंगदान: एक महादान, कैसे बचाएं किसी की जान?

अंगदान दो प्रकार का होता है: जीवित दान (जैसे एक किडनी या लिवर का हिस्सा) और मृत दान (ब्रेन डेड होने के बाद)।

  1. प्रक्रिया : जब किसी व्यक्ति को अस्पताल में 'ब्रेन डेड' (मस्तिष्क की मृत्यु) घोषित कर दिया जाता है, तभी हृदय, लिवर, किडनी और फेफड़े जैसे महत्वपूर्ण अंग दान किए जा सकते हैं।

  2. सहमति : हालांकि कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में 'ऑर्गन इंडिया' या सरकारी पोर्टल पर फॉर्म भरकर अंगदान की शपथ (Pledge) ले सकता है, लेकिन मृत्यु के बाद परिजनों की लिखित सहमति अनिवार्य होती है।

  3. क्या करें: यदि आप अंगदान करना चाहते हैं, तो अपने परिवार को इस इच्छा के बारे में जरूर बताएं। ब्रेन डेड की स्थिति में अस्पताल के 'ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर' से संपर्क कर इस प्रक्रिया को पूरा किया जा सकता है।

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