सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि भाजपा सरकार ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की आड़ में देश के किसान, छोटे व मझोले उद्यमियों, बिजली उपभोक्ताओं, डेटा प्राइवेसी समेत अनेक सेक्टरों की बलि चढ़ा दी है। यह व्यापार समझौता नहीं, जबरदस्ती थोपी गई आर्थिक गुलामी है। ये किसी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील भारत के किसानों को गरीबी के दल दल में धकेल देगी।
सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने शनिवार को कई कार्यक्रमों में शिरकत की और यह बात कही। इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हरित क्रांति का नारा दिया था। जब देश की आबादी 30 करोड़ थी तब हम बाहर से अनाज मंगवाकर खाते थे। कांग्रेस की तमाम सरकारों ने किसानों को जो प्रोत्साहन दिया, उसका नतीजा है कि आज 140 करोड़ से ज्यादा लोगों की भूख मिट रही है, लेकिन, आत्मनिर्भर भारत की खोखली बातें करने वाले लोग अमेरिका-निर्भर भारत की तरफ कदम बढ़ा रहे है। कांग्रेस देश के किसानों के हितों पर कुठाराघात नहीं होने देगी।
सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में मोदी सरकार ने भारत के किसानों, मजदूरों पर बड़ा प्रहार किया है। ये समझौता किसानों के साथ साथ कारोबारियों की भी कमर तोड़ देगा। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अमेरिकी कपास व धागा आयात कर जो कपड़ा व वस्त्र अमेरिका को निर्यात करेगा, उस पर अमेरिका में जीरो शुल्क लगेगा। इसके विपरीत, भारत जो कपड़ा व वस्त्र का बड़ा निर्यातक है, हमारे निर्यात पर 18 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इससे हरियाणा में पानीपत, पंजाब में लुधियाना, गुजरात में सूरत, समेत पूरे देश के वस्त्र उद्योग पर भी विपरीत असर पड़ेगा। बांग्लादेश भारत से 50 प्रतिशत कपास का आयात करता है। अब कपास का भारत से बांग्लादेश को निर्यात भी बंद हो जाएगा। इससे हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक के कपास पैदा करने वाले किसान पर दोहरी मार पड़ेगी। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, पलायन, अपराध, नशाखोरी हरियाणा में है। इंटरनेशनल एयरपोर्ट, रेल कोच फैक्ट्री, रक्षा विश्वविद्यालय जैसे बड़े-बड़े प्रोजेक्ट हमने मंजूर कराए वो हरियाणा से बाहर के प्रदेशों में चले गये लेकिन प्रदेश की बीजेपी सरकार चुपचाप देखती रही। एचपीएससी में जो भर्तियां आती हैं उसमें भी हरियाणा के बाहर के बच्चे लग रहे हैं।

