बरसात से अनाज मंडी में खुले में रखा हजारों क्विंटल गेहूं भीग गया। जिससे एक बार फिर मंडी व्यवस्था और सरकारी सिस्टम की पोल खुल गई। खुले में पड़े गेहूं के कारण किसान और आढ़ती दोनों परेशान नजर आ रहे हैं। मंगलवार को भी मौसम खराब रहा। रुक-रुककर हुई बूंदाबांदी ने अनाज मंडी में खुले आसमान के नीचे पड़ा किसानों का हजारों क्विंटल गेहूं खराब कर दिया। किसानों का कहना था कि समय पर उठान नहीं होने और पर्याप्त इंतजाम न होने की वजह से उनकी फसल खराब हो रही है। आढ़तियों ने गेट पास सिस्टम को बड़ी समस्या बताया। उनका कहना है कि समय पर गेट पास नहीं मिलने के कारण खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और मंडी में अनाज का ढेर लग रहा है। मंडी के पूर्व प्रधान हरेन्द्र सिलाना ने कहा कि सरकार और इंद्रदेव दोनों ही रूठे हुए हैं। आरोप लगाया कि मंत्री और अधिकारी सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा। इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया है कि अगर समय रहते मंडी में उचित प्रबंधन, तकनीकी सुधार और प्रशासनिक सक्रियता नहीं लाई गई, तो किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
नारनौल (हप्र) : पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम ने अचानक करवट ले ली है। तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी के कारण दिन व रात के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। जहां आमजन को गर्मी से राहत मिली है, वहीं किसानों के लिए यह मौसम आफत बन गया है। जिले में सुबह से बादलों की आवाजाही बनी रही और दोपहर बाद 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई। नारनौल में 4.5 मिमी, अटेली में 5.5 मिमी, नांगल चौधरी में 7.0 मिमी तथा महेंद्रगढ़ में 1.0 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई, जबकि कनीना और सतनाली में बूंदाबांदी हुई। बारिश और तेज हवाओं के कारण सरसों और गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। खेतों में कटी हुई सरसों की फसल भीगने से खराब होने लगी है, वहीं गेहूं की तैयार फसल भी हवा और बारिश से झुककर गिर रही है। किसानों का कहना है कि अगर मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो नुकसान व बढ़ सकता है। कई किसान जल्दबाजी में फसल कटाई में जुट गए हैं, जबकि कुछ किसान मौसम सुधरने का इंतजार कर रहे हैं। तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। नारनौल में अधिकतम तापमान 24.5 डिग्री और न्यूनतम 18.5 डिग्री सेल्सियस रहा।

