अंतर्राष्ट्रीय बागवानी मंडी का संयुक्त राष्ट्र के एफएओ प्रतिनिधि मंडल ने किया निरीक्षण
एफएओ सदस्य टाका ने मंडी में आधुनिक तकनीक के साथ हो रहे कार्यों की सराहना की
अंतर्राष्ट्रीय बागवानी मंडी में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के सदस्य टाका ने प्रतिनिधि मंडल के साथ पहुंचकर मंडी परिसर का दौरा किया। इस दौरान राज्य कृषि विपणन बोर्ड की राष्ट्रीय परिषद के प्रबंध निदेशक जेएस यादव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। उन्होंने मंडी में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और आधुनिक सुविधाओं का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मंडी में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीक, भंडारण व्यवस्था, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक सुविधाओं और किसानों को मिलने वाली प्रस्तावित सुविधाओं की जानकारी दी।
एफएओ सदस्य टाका ने मंडी में आधुनिक तकनीक के साथ हो रहे कार्यों को सराहते हुए इसे किसानों और बागवानी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि भारत को एग्रीकल्चर क्षेत्र में अब परंपरागत उत्पादन से आगे बढक़र डिमांड आधारित कार्यप्रणाली अपनाने की आवश्यकता है। वर्तमान में देश कृषि को एक महत्वपूर्ण क्षेत्र मानते हुए नई तकनीकों के माध्यम से मांग और आपूर्ति की नीति पर बेहतर ढंग से काम कर रहा है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्लेटफार्म, कोल्ड चेन और प्रोसेसिंग सुविधाओं के जरिए किसानों को सही समय पर सही बाजार से जोड़ा जा रहा है। इससे न केवल फसलों का उचित मूल्य मिलेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में स्थिरता और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। निर्माण से किसानों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और निर्यात के अवसर मिलेंगे।
डीसी ने अधिकारियों के साथ छह मुद्दों पर की चर्चा
डीसी सुशील सारवान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारतीय अंतर्राष्ट्रीय बागवानी मंडी, गन्नौर में चल रहे विकास कार्यों में तेजी लाई जाए तथा लंबित मुद्दों का शीघ्र समाधान किया जाए। डीसी की अध्यक्षता में शुक्रवार को मंडी परिसर में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई जिसमें मंडी से जुड़े छह प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
समीक्षा बैठक के दौरान छुटी हुई भूमि के टुकड़ों के अधिग्रहण, श्मशान घाट के स्थानांतरण, वाल्मीकि आश्रम एवं शिवाजी महाराज मंदिर से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त मंडी से संबंधित टेहा गांव के आसपास की बस्तियों के अपशिष्ट जल के निपटान तथा अतिक्रमणकारियों के पुनर्वास जैसे जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

