काम का अधिकार तभी बचेगा जब सभी एकजुट होकर खड़े होंगे : कैप्टन अजय यादव
‘काम चाहिए, हक चाहिए, मनरेगा चाहिए’ के नारे के साथ मनरेगा बचाओ संघर्ष अभियान के अंतर्गत हेलीमंडी (पटौदी विधानसभा क्षेत्र) स्थिति पीली धर्मशाला में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ओबीसी सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व...
‘काम चाहिए, हक चाहिए, मनरेगा चाहिए’ के नारे के साथ मनरेगा बचाओ संघर्ष अभियान के अंतर्गत हेलीमंडी (पटौदी विधानसभा क्षेत्र) स्थिति पीली धर्मशाला में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ओबीसी सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कैप्टन अजय सिंह यादव ने कहा कि काम का अधिकार तभी बचेगा जब हम सब एकजुट होकर इसके लिए खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीब, मजदूर और ग्रामीण भारत के लिए कानूनी अधिकार है, जिसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। कैप्टन अजय सिंह यादव ने बताया कि मनरेगा योजना को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 2006 में लागू किया गया था। इस कानून के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई थी। यह दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजनाओं में से एक रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में भाजपा इस कानून की मूल भावना को खत्म करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार योजना का नाम और स्वरूप बदलकर इसे कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि महात्मा गांधी के नाम को हटाकर योजना की आत्मा को बदला जा रहा है। गांधीवादी विचारधारा के विपरीत सोच को इसमें लाने की कोशिश हो रही है। तथा सरकार का असली उद्देश्य गरीबों को रोजगार से वंचित करना है।
उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के अंतर्गत यह तय करने का अधिकार ग्राम पंचायतों के पास होता था कि गांव में कौन-कौन से कार्य कराए जाएंगे। लेकिन अब नए नियमों के तहत यह अधिकार पंचायतों से छीनकर सरकार के हाथ में दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय जरूरतों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने चेताया कि यदि मनरेगा को कमजोर किया गया तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, मजदूरों और गरीब परिवारों पर पड़ेगा।

