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तकनीकी वस्त्र, संरचनात्मक कंपोजिट्स औद्योगिक प्रगति की आधारशिला

टीआईटीएस में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज, कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह बोले

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भिवानी के टीआईटीएस संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को स्मृति चिन्ह भेंट करते संस्थान के निदेशक प्रो. बीके बेहरा और अन्य। -हप्र
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तकनीकी और कंपोजिट टेक्सटाइल को गांव स्तर पर लोगों के दिलो-दिमाग तक ले जाने की जरूरत है। अब भारत में ही कंपोजिट व जीयो सिंथेटिक कपड़ा तैयार होगा। लोहे के सरिये के स्थान पर जियो सिंथेटिक मैटीरियल का प्रयोग किया जाएगा, जो लोहे से वजन में हलका होता है और इसकी कीमत भी कम होगी। आने वाले समय में भवन निर्माण के साथ-साथ हवाई जहाज निर्माण, एयर क्राफ्ट निर्माण और विंड टरबाइन में कंपोजिट मैटीरियल का प्रयोग होगा। टीआईटीएस संस्थान में शनिवार को एडवांस्ड टेक्सटाइल स्ट्रक्चरल कंपोजिट एंड जियो सिंथेटिक्स विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुये केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने यह बात कही। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तकनीकी वस्त्र एवं कंपोजिट प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया तथा विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक एवं औद्योगिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए टीआईटी संस्थान ने 6 महत्वपूर्ण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। सम्मेलन में विधायक घनश्याम सर्राफ और भाजपा जिलाध्यक्ष विरेंद्र कौशिक भी मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुये केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि तकनीकी वस्त्र एवं संरचनात्मक कंपोजिट्स औद्योगिक प्रगति की आधारशिला हैं। भारत सरकार की वस्त्र नीति देश को वैश्विक विनिर्माण एवं नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में पहली बार टेक्सटाइल क्षेत्र में साढ़े 10 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक की राशि पीएलआई में और डेढ़ हजार करोड़ रुपए टेक्सटाइल पर रिसर्च के लिए दिया है। सरकार ने कपड़ा उद्योग क्षेत्र में 15 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त निवेश किया है। उन्होंने कहा कि टैरिफ वार के दौरान भी भारत में छह हजार कराड़ रुपए से भी अधिक कीमत के कपड़े का निर्यात किया। आने वाले समय में भारत तकनीकी आधार पर बनने वाले कंपोजिट टेक्सटाइल व जियो सिंथेटिक टेक्सटाइल का निर्यात 200 बिलयिन से भी अधिक लेकर जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के माध्यम से अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप प्रोत्साहन और उद्योग-शिक्षा सहयोग को सुदृढ़ किया जा रहा है। आज हर क्षेत्र में स्टार्टअप की जरूरत है। टेक्नोलॉजी के बिना हर चीज अधूरी है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज एआई तकनीक का जमाना है। एआई तकनीक से हम तुरंत डाटा निकाल सकते हैं। उन्होने कहा कि टेक्नोलॉजी में भारत किसी से पीछे रहने वाला नही है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए भारत सरकार के राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के मिशन निदेशक अशोक मल्होत्रा ने कहा कि तकनीकी वस्त्र मिशन का उद्देश्य अनुसंधान को प्रयोगशाला से उद्योग तक पहुंचाना है। वहीं दूसरी ओर टीआईटीएस संस्थान के निदेशक प्रो. बीके बेहरा ने सम्मेलन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संरचनात्मक कंपोजिट सामग्री हल्की, मजबूत एवं टिकाऊ होने के कारण विमानन उद्योग, ऊर्जा क्षेत्र, रेलवे तथा सामान्य परिवहन सहित अनेक क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग की

जा रही है। सम्मेलन के दौरान संस्थान द्वारा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं औद्योगिक सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु छह महत्वपूर्ण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए। सम्मेलन के दौरान टीआईटीएस ने टेक्निकल यूनिवर्सिटी, चेक रिपब्लिक, सिंशु यूनिवर्सिटी, जापान, चेक यूनिवर्सिटी ऑफ लाइफ साइंस (फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग), चेक गणराज्य, खमेलनिटस्की नेशनल यूनिवर्सिटी, यूक्रेन, यूनिवर्सिटी ऑफ जिलीना , स्लोवाकिया कलरेंट लिमिटेड, अहमदाबाद के साथ एमओयू किया गया। इन समझौतों के अंतर्गत संयुक्त शोध, फैकल्टी एवं छात्र विनिमय, तकनीकी प्रशिक्षण तथा उद्योग-शैक्षणिक साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।

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