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गीता की शिक्षाएं आधुनिक जीवन का आधार : डॉ. मार्कंडेय आहुजा

सीएलयू भिवानी में गीता महोत्सव के तहत सेमिनार आयोजित

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गीता महोत्सव कार्यक्रम में उपस्थित कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी, मुख्य वक्ता डॉ. मार्कंडेय आहुजा व अन्य। -हप्र
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भिवानी में जिला स्तरीय गीता महोत्सव श्रृंखला के अंतर्गत चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (सीएलयू) के भारतीय संस्कृति एवं भाषा विभाग में ‘वर्तमान में गीता की शिक्षाओं की महत्ता और प्रासंगिकता’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मार्कंडेय आहुजा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।

'गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन करने वाली महान कृति'

कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी के अध्यक्षीय उद्बोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन करने वाली महान कृति है, जो कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग के माध्यम से आत्मसाक्षात्कार का संदेश देती है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे गीता के सिद्धांतों को अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में अपनाएं।

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मानविकी संकाय के डीन डॉ. विपिन जैन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि गीता महोत्सव एक आध्यात्मिक अनुभूति है, जो समाज को नैतिक मूल्यों से जोड़ता है। विभागाध्यक्ष डॉ. लखा सिंह ने गीता को जीवन, ज्ञान और कर्म के संतुलन का प्रतीक बताया।

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मुख्य वक्ता डॉ. मार्कंडेय आहुजा ने अपने व्याख्यान में गीता की प्रासंगिकता को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में समझाया। उन्होंने कहा कि गीता के ‘कर्मयोग’ व ‘निस्वार्थ सेवा’ के सिद्धांत न केवल व्यक्ति के जीवन में संतुलन लाते हैं, बल्कि राष्ट्र व समाज के विकास में भी योगदान करते हैं। उन्होंने गीता के प्रमुख श्लोकों का विश्लेषण करते हुए उनके व्यावहारिक उपयोग पर प्रकाश डाला।


डॉ. आहुजा ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि संकट के समय स्थिर मन, कर्तव्यपालन और धर्म का अनुसरण ही सफलता की कुंजी है। व्याख्यान के दौरान उन्होंने छात्रों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। सेमिनार में गीता के दार्शनिक, नैतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विशेष चर्चा हुई। उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इसे ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया।

कार्यक्रम में डॉ. मुरलीधर शास्त्री और जिला संपर्क अधिकारी सुरेंद्र ने भी गीता के संदेशों पर अपने विचार व्यक्त किए। समापन अवसर पर कुलपति प्रो. धर्माणी ने आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को धर्म, कर्म और संस्कृति के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।

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