Surajkund Mela Swing Accident: सूरजकुंड मेले में झूला हादसे पर मानव अधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट
Surajkund Mela Swing Accident: झूला दुर्घटना के बाद सुरक्षा मानकों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की चेतावनी
Surajkund Mela Swing Accident: सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला 2026 की चकाचौंध के बीच 7 फरवरी को हुए दर्दनाक झूला हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना में 13 लोग घायल हुए, जबकि बचाव कार्य के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिस निरीक्षक जगदीश प्रसाद ने अपनी जान गंवा दी। हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने 8 फरवरी को प्रकाशित समाचार रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले को अत्यंत गंभीर माना है और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब तलब किया है।
7 फरवरी की शाम करीब 6:30 बजे विद्युत संचालित झूला टेट गया। इसमें लगभग 26 लोग सवार थे। हादसे के बाद मेले में भगदड़ मच गई। कई लोग झूले में फंस गए और कुछ नीचे गिरकर घायल हो गए। घायलों को सुप्रीम हॉस्पिटल और बीके सिविल हॉस्पिटल, फरीदाबाद में भर्ती कराया गया। बचाव के दौरान निरीक्षक जगदीश प्रसाद पीड़ितों की मदद के लिए दौड़े, तभी झूले का एक और हिस्सा गिर पड़ा और वे उसकी चपेट में आ गए। गंभीर चोटों के कारण उनकी मृत्यु हो गई।
आयोग ने देखीं मौके पर खामियां
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा, सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया उसी दिन मेले में जागरूकता शिविर के सिलसिले में मौजूद थे। आयोग के अनुसार, फूड कोर्ट के पास तेज हवा से एक अस्थायी प्रवेश द्वार गिर गया, जिससे 2-3 लोग घायल हुए। गेट नंबर-2 के पास एक और अस्थायी ढांचा खतरनाक तरीके से झुक गया था, जिसे समय रहते हटाया गया। आयोग ने माना कि ये घटनाएं अस्थायी संरचनाओं की कमजोर स्थापना और तकनीकी लापरवाही का संकेत हैं।
तकनीकी जांच और प्रमाणन पर सवाल
आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि मेले के उदघाटन से पहले किसी सक्षम तकनीकी समिति द्वारा संरचनात्मक और विद्युत सुरक्षा की समग्र जांच की गई हो। संरचनात्मक स्थिरता, वायु वेग का आकलन, भार क्षमता और विद्युत सुरक्षा जैसे मूल पहलुओं की अनदेखी को आयोग ने गंभीर प्रशासनिक चूक बताया है।
आपदा प्रबंधन भी सवालों के घेरे में
आयोग के अनुसार, इतने बड़े आयोजन में अपेक्षित स्तर पर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल, प्रशिक्षित बचावकर्मी और पर्याप्त चिकित्सा इकाइयों की तैनाती स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दी। मेले के कई मार्ग असमान और अव्यवस्थित पाए गए, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और दिव्यांगजनों को कठिनाई हुई। आयोग ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार के संभावित उल्लंघन से जोड़ा है।
मेला तभी फेयर जब हर पहलू सुरक्षित
आयोग ने टिप्पणी की कि किसी भी ‘फेयर’ (मेला) को हर दृष्टि से निष्पक्ष और सुरक्षित होना चाहिए। यदि सुरक्षा मानकों से समझौता होता है, तो आयोजन ‘अनफेयर’ बन जाता है। सांस्कृतिक उत्सव, आर्थिक गतिविधि और मनोरंजन के साथ सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को समान महत्व देना अनिवार्य है।
सख्त निर्देश और रिपोर्ट तलब
आयोग ने राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा पर शून्य सहनशीलता नीति अपनाई जाए। बहु-विषयक तकनीकी समिति के प्रमाणन के बिना कोई आयोजन शुरू न हो। सभी झूलों और अस्थायी ढांचों का तृतीय-पक्ष सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। पर्याप्त एंबुलेंस, अग्निशमन और बचाव दल तैनात हों। निकासी मार्ग स्पष्ट और बाधा-रहित हों। फरीदाबाद डीसी को चार सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस महानिदेशक से निरीक्षक जगदीश प्रसाद की मृत्यु और उनके आश्रितों को मुआवजे संबंधी जानकारी मांगी गई है। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी।

