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सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प आत्मनिर्भर मेला सभ्यता, समागम और सहयोग से ही हुआ संभव : नायब सैनी

उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री ने गोहाना की जलेबी चखकर किया लोक संस्कृति का स्वागत 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर हस्तशिल्प मेले का शुभारंभ मुख्य चौपाल पर हुआ, जहां उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उपस्थित लोगों को संबोधित...

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फरीदाबाद में गोहाना की जलेबियों का स्वाद चखते उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री नायब सैनी, पर्यटन मंत्री अरविन्द शर्मा व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मोहन लाल बड़़ौली। -हप्र
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उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री ने गोहाना की जलेबी चखकर किया लोक संस्कृति का स्वागत

39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर हस्तशिल्प मेले का शुभारंभ मुख्य चौपाल पर हुआ, जहां उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेला सभ्यता, समागम और सहयोग से ही चलता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मेले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक समृद्धता आई है, जिसमें मिस्र की विशेष भागीदारी और उत्तर प्रदेश तथा मेघालय के स्टॉलों ने विविधता बढ़ाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेले में शामिल शिल्पकारों और कलाकारों को सीधे उपभोक्ताओं तक अपने उत्पाद पहुंचाने का अवसर मिलता है, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने शिल्पकारों से आह्वान किया कि वे अपनी कला को आधुनिक तकनीक के माध्यम से और प्रभावशाली बनाएं और लोकल को ग्लोबल बनाकर आत्मनिर्भर भारत की पहचान मजबूत करें।

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सहकारिता एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा मंच पर गोहाना की ताजा जलेबियां लेकर आए और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, मिस्र के एम्बेसडर कमल जायद गलाल, डिप्टी एम्बेसडर दालिया तांतवे सहित देश-विदेश से आए अतिथियों को जलेबी खिलाई।

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उपराष्ट्रपति ने जलेबी की तारीफ करते हुए कहा कि यह केवल मिठाई नहीं, बल्कि हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोहाना की जलेबी का स्वाद आज भी उतना ही खास है जितना इसे पूरे देश में प्रसिद्ध बनाता है। डॉ. अरविंद शर्मा ने बताया कि गोहाना की जलेबी केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि हरियाणा की संस्कृति, मेहमाननवाजी और अपनत्व का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि जैसे यह मिठाई स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकी है, वैसे ही सूरजकुण्ड शिल्प मेला शिल्पकारों को वैश्विक मंच पर नाम रोशन करने का अवसर देता है। मेले में उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री सहित देशी-विदेशी मेहमानों ने हस्तशिल्प की विविधता और हरियाणा की लोक कला का आनंद लिया, जिससे सांस्कृतिक समागम और आत्मनिर्भर भारत की सोच को बल मिला।

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