विद्यार्थियों को अनुशासन, संयम और संस्कार के साथ आगे बढ़ना चाहिए : प्रो. दीप्ति धर्माणी
सफलता के लिए कम्युनिकेशन स्किल पर करें फोकस : शिवरामन गौड़
चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में नवप्रवेशित यूजी एवं पीजी विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ (इंडक्शन) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। श्रीनिवास रामानुजन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मोटिवेशनल सत्रों के माध्यम से उच्च शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और करियर निर्माण के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व सूचना आयुक्त एवं आईएएस अधिकारी तथा प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस शिवरामन गौड़, अंकुर अग्रवाल और सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी ने बतौर वक्ता विद्यार्थियों को संबोधित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने कहा कि विश्वविद्यालय का अस्तित्व उसके विद्यार्थियों से है। विद्यार्थियों को अपने अंदर प्रश्न पूछने और सीखने की जिज्ञासा पैदा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी शिक्षक से जितने अधिक प्रश्न करेगा, उतना ही स्वयं के विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि माता-पिता और गुरु ही ऐसे लोग हैं, जो अपने बच्चों और विद्यार्थियों को आगे बढ़ता देखना चाहते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से पूर्ण अनुशासन, संयम और संस्कार के साथ आगे बढ़ने तथा अपने कौशल को विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हर शब्द के पीछे एक भाव और संस्कार होता है, इसलिए हमेशा अच्छे शब्दों का चयन करें और अभद्र भाषा के प्रयोग से बचें।
कुलगुरु ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि वे सौभाग्यशाली हैं कि उन्होंने शिक्षा के लिए चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय को चुना है।
समय का सदुपयोग करें विद्यार्थी : शिवरामन गौड़
पूर्व सूचना आयुक्त एवं आईएएस अधिकारी शिवरामन गौड़ ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी विद्यार्थी जीवन की याद हमेशा आती है। इसलिए विद्यार्थियों को अपने समय का सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, संयम और सकारात्मक ऊर्जा के साथ रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सफलता हासिल करने के लिए विद्यार्थियों को अपने कम्युनिकेशन स्किल पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए।
विशेषज्ञ अंकुर अग्रवाल ने पॉक्सो एक्ट और वित्तीय साक्षरता के संबंध में विद्यार्थियों को विस्तृत जानकारी दी। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर एवं डीन प्रो. संजीव कुमार ने परिसर में अनुशासन बनाए रखने तथा कक्षाओं में नियमित रूप से उपस्थित रहने पर जोर दिया। उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के विभिन्न पहलुओं की भी जानकारी दी।
डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. सुरेश मलिक ने विद्यार्थियों से अपने सर्वांगीण विकास के लिए विश्वविद्यालय में संचालित खेल, शिक्षा एवं अनुसंधान, एनएसएस और सांस्कृतिक गतिविधियों में अधिक से अधिक सहभागिता करने का आह्वान किया। डीन अकादमिक अफेयर्स प्रो. सुनीता भरतवाल और डीन प्रो. ललिता गुप्ता ने भी विद्यार्थियों से अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीलम ने किया।
इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. भावना शर्मा, डीन ऑफ कॉलेज प्रो. एसके कौशिक, प्रो. विपिन जैन, प्रो. रविप्रकाश, डॉ. पार्वती शर्मा, डॉ. स्नेहलता, डॉ. सोनल, डॉ. सोनिका, डॉ. नीति सहित विश्वविद्यालय के अनेक कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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