Sonipat School Accident: एक बच्चे की मौत से पूरे हरियाणा के सरकारी स्कूलों की सुरक्षा जांच के घेरे में
सोनीपत में गेट का हिस्सा गिरने से 11 वर्षीय यश की मौत पर मानवाधिकार आयोग का स्वतः संज्ञान
सोनीपत के गन्नौर में सरकारी स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार का हिस्सा गिरने से 11 वर्षीय छात्र यश कुमार की मौत ने अब पूरे हरियाणा के सरकारी स्कूलों की भवन सुरक्षा व्यवस्था को जांच के घेरे में ला दिया है। हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केवल इस हादसे की जांच तक मामला सीमित नहीं रखा, बल्कि राज्यभर में जर्जर और असुरक्षित सरकारी स्कूल भवनों की स्थिति तथा उनकी सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी तलब की है। आयोग ने खास तौर पर यह भी पूछा है कि 2025 में हिसार के सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों को लेकर दिए गए आश्वासनों और निवारक उपायों को वास्तव में लागू किया गया या नहीं और उनके अनुपालन की जमीनी पुष्टि के लिए कोई निगरानी तंत्र बनाया गया था या नहीं।
गेट गिरा, बच्चा दबा और चली गई जान
आयोग ने 7 अगस्त को प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के आधार पर गन्नौर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय, गढ़ी बिलिंदा की घटना का स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 6 अगस्त को स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार का ईंट-कंक्रीट से बना मेहराबनुमा हिस्सा गिर गया। इसी दौरान वहां मौजूद गांव गढ़ी बिलिंदा निवासी 11 वर्षीय यश कुमार मलबे के नीचे दब गया। यश गांव बेगा स्थित एक अन्य राजकीय विद्यालय में कक्षा छठी का छात्र था। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसे गन्नौर के अस्पताल ले जाया गया और वहां से खानपुर स्थित भगत फूल सिंह राजकीय महिला चिकित्सा महाविद्यालय रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना में स्कूल का चौकीदार भी घायल हुआ।
बेल खींचने के दौरान भरभराकर गिरा ढांचा
समाचार रिपोर्टों के अनुसार घटना के समय स्कूल का चौकीदार मुख्य गेट के ऊपर उगी घास और बेलों को हटाने का प्रयास कर रहा था। इन्हें खींचे जाने के दौरान गेट और पिलर से जुड़ी ईंटों की संरचना अचानक ढह गई। आयोग ने स्कूल की कथित जर्जर स्थिति से जुड़ी उन रिपोर्टों को भी गंभीरता से लिया है, जिनमें दीवारों में दरारें, छत से पानी का रिसाव और दूसरी संरचनात्मक कमियों का उल्लेख था। रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि स्कूल की मरम्मत और सुरक्षा को लेकर पहले चिंताएं जताई गई थीं तथा ग्राम पंचायत की ओर से संबंधित अधिकारियों को पत्राचार किए जाने की बात भी सामने आई थी।
हिसार के पुराने मामले ने बढ़ाई चिंता
आयोग ने इस घटना को अपने स्वतः संज्ञान मामला संख्या 10/7/6/2025 से भी जोड़ा है। यह मामला हिसार जिले के सरकारी स्कूल भवनों की जर्जर और असुरक्षित स्थिति से संबंधित था। उस मामले में आयोग ने स्कूलों की स्थिति और बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। अब सोनीपत की घटना के बाद आयोग ने सीधे यह जानना चाहा है कि उस मामले में आयोग के सामने रखी गई सिफारिशों, आश्वासनों और निवारक उपायों का वास्तव में पालन हुआ या नहीं। साथ ही यह भी बताना होगा कि कमियों को दूर किए जाने की पुष्टि के लिए कोई निगरानी व्यवस्था बनाई गई थी या नहीं।
सिर्फ रिपोर्ट नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए
आयोग ने स्पष्ट किया है कि असुरक्षित स्कूल भवन की पहचान कर लेना या उसके संबंध में रिपोर्ट तैयार कर देना पर्याप्त नहीं है। ऐसी पहचान के बाद समयबद्ध, ठोस और सत्यापन योग्य सुधारात्मक कार्रवाई जरूरी है, ताकि ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। आयोग के रुख से साफ है कि अब सवाल केवल यह नहीं रहेगा कि किस स्कूल की इमारत जर्जर थी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि जर्जरता की जानकारी मिलने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या किया और उस कार्रवाई की जांच किस स्तर पर हुई।
सोनीपत के सभी स्कूलों की मांगी स्थिति
आयोग ने संबंधित अधिकारियों से यह भी बताने को कहा है कि सोनीपत जिले में किसी राजकीय प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को असुरक्षित प्रवेश द्वार, मेहराब, चारदीवारी, छत या किसी अन्य संरचना के कारण चिन्हित किया गया है या नहीं। यदि ऐसे स्कूल चिन्हित किए गए हैं तो प्रत्येक मामले में की गई या प्रस्तावित सुधारात्मक कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा भी देना होगा।
हादसे की जांच से लेकर मुआवजे तक रिपोर्ट तलब
आयोग ने संबंधित अधिकारियों और विभागों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें स्कूल परिसर की सुरक्षा स्थिति, पूर्व में हुए निरीक्षण, प्राप्त शिकायतें, मरम्मत और रखरखाव के काम, घटना की विभागीय और पुलिस जांच, किसी लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई तथा मृतक बच्चे के माता-पिता या कानूनी वारिसों को दिए गए अथवा प्रस्तावित मुआवजे की जानकारी शामिल होगी।
अगली सुनवाई पहली अक्टूबर को
आयोग ने पूरे राज्य के सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे, संरचनात्मक सुरक्षा और मरम्मत-रखरखाव की स्थिति का व्यापक आकलन भी मांगा है। मामले की अगली सुनवाई पहली अक्टूबर को होगी। तब तक संबंधित अधिकारियों को अपेक्षित रिपोर्ट आयोग के सामने रखनी होगी।

