सोनीपत के मेयर का PM मोदी को पत्र, खाद्य पदार्थों और नकली दवाइयों में मिलावट पर बने सख्त कानून
गृह, कानून और खाद्य आपूर्ति मंत्री को भी भेजी पत्र की प्रति, स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़े दंड की वकालत
खाद्य पदार्थों और नकली दवाइयों में बढ़ती मिलावट को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सोनीपत नगर निगम के मेयर राजीव जैन ने केंद्र सरकार से कड़े कानूनी हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में उन्होंने मिलावटखोरों के खिलाफ कठोर कानून बनाने और गंभीर मामलों में मौत की सजा तक का प्रावधान करने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि बाजार में रोजमर्रा के खाद्य उत्पादों से लेकर नकली दवाइयों तक का फैलता कारोबार लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहा है और मौजूदा कानूनी व्यवस्था इसके प्रभावी नियंत्रण में पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। मेयर ने पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय गृह मंत्री, कानून मंत्री और खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री को भी भेजी है।
दूध से दवा तक, बढ़ता जा रहा खतरा
पत्र में कहा गया है कि बाजार में दूध, घी, पनीर, मावा, मसाले, दालों सहित दैनिक उपयोग की कई वस्तुओं में मिलावट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसके साथ नकली ब्रांड और नकली दवाइयों का कारोबार भी चिंता का विषय बन चुका है।
उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पाद सीधे लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं और कई गंभीर बीमारियों की वजह बन रहे हैं। इसका असर केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं है बल्कि व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में सामने आ रहा है।
मौजूदा कानून के बावजूद नहीं रुक रही मिलावट
मेयर जैन ने कहा कि देश में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम लागू होने के बावजूद मिलावटखोरी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा है। उनके अनुसार समय-समय पर यह मुद्दा संसद में भी उठता रहा है, लेकिन अब केवल चर्चा नहीं बल्कि कठोर कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि दंडात्मक व्यवस्था मजबूत नहीं होगी तो ऐसे मामलों पर स्थायी रोक लगाना कठिन होगा।
सख्त कानूनी प्रावधान की मांग
पत्र में प्रधानमंत्री से आग्रह किया गया है कि मिलावट और नकली दवाइयों जैसे मामलों को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखते हुए कड़े दंड का प्रावधान किया जाए। मेयर का कहना है कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई ही इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान हो सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में प्रभावी और सख्त कानून बनाने पर विचार करने का अनुरोध किया है।

