डीएलसी सुपवा में सांग समागम का आगाज
दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय (डीएलसी सुपवा) में बृहस्पतिवार को विवि का पहला ‘सांग समागम’ आयोजित किया गया। हरियाणा की लोक-नाट्य परंपरा सांग के पुनर्जागरण की दिशा में सशक्त सांस्कृतिक पहल के रूप में सामने आया।...
दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय (डीएलसी सुपवा) में बृहस्पतिवार को विवि का पहला ‘सांग समागम’ आयोजित किया गया। हरियाणा की लोक-नाट्य परंपरा सांग के पुनर्जागरण की दिशा में सशक्त सांस्कृतिक पहल के रूप में सामने आया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि सांग समागम हरियाणा की उस मिट्टी से जुड़ी कलात्मक अभिव्यक्ति को स्वर देता है, जो हमारी पहचान का मूल है। आज के युवाओं को आधुनिकता की ओर बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत की सुगंध नहीं भूलनी चाहिए। कार्यक्रम में महान सांग प्रतीकों शहीद फौजी मेहर सिंह, पंडित मांगे राम, प्रदीप राय निंदाना, पंडित विष्णु दत्त और सूर्य कवि बाजे भगत जी के परिवारजनों और सहयोगियों को सांग परंपरा में उनके कालजयी योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कुलपति डॉ. अमित आर्य ने कहा कि सांग हरियाणा की सामाजिक स्मृति, साहस, हास्य और विवेक को वहन करने वाली एक जीवंत परंपरा है। जब यह कला-रूप क्षरण की ओर बढ़ रहा है, सांग समागम हमारा सामूहिक संकल्प है कि इन स्वरूपों को फिर से सुना जाए, समझा जाए और मंच पर जिया जाए। इस अवसर पर मनीष ग्रोवर, प्रो. राजबीर सिंह, एनसीज़ेडसीसी के सदस्य अजय गुप्ता, एलपीएस बोसार्ड के प्रबंध निदेशक राजेश जैन, प्रो. दीप्ति धरमानी, प्रो. असीम मिगलानी तथा आईआईएम रोहतक के निदेशक प्रो. धीरज शर्मा मौजूद थे।

