बिजली संशोधन बिल के खिलाफ 10 मार्च को प्रदर्शन : सुभाष लांबा
फरीदाबाद में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बिजली संशोधन बिल को लेकर बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संगठनों ने विरोध तेज कर दिया है। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज एंड इंजीनियर्स के वरिष्ठ सदस्य तथा इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया...
फरीदाबाद में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बिजली संशोधन बिल को लेकर बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संगठनों ने विरोध तेज कर दिया है। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज एंड इंजीनियर्स के वरिष्ठ सदस्य तथा इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि बिल के विरोध में 10 मार्च को देशभर में बिजली कर्मचारी और इंजीनियर कार्य बहिष्कार कर प्रदर्शन करेंगे।
सुभाष लांबा ने बताया कि उसी दिन नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में सभी राजनीतिक दलों के संसदीय नेताओं और सांसदों को आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन के दौरान प्रतिनिधि सांसदों को इस बिल के संभावित प्रभावों से अवगत कराएंगे और संसद में बिल का विरोध करने की अपील करेंगे। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।
केंद्र सरकार जल्दबाज़ी में बिल पास करवाना चाहती है
ईईएफआई के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा और ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन के राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष शब्बीर अहमद ने कहा कि केंद्र सरकार जल्दबाजी में इस बिल को संसद में पेश कर पारित करवाना चाहती है। उनका आरोप है कि यह बिल बिजली वितरण प्रणाली को निजी कंपनियों के लिए खोलने का रास्ता तैयार करेगा, जिससे बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों को बिजली वितरण के लाइसेंस दिए जाने के बाद वे अधिक मुनाफे वाले औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दे सकती हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी सरकारी निगमों पर आ सकती है। इससे सरकारी बिजली निगमों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
नेताओं ने यह भी कहा कि सब्सिडी और क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था प्रभावित होने से बिजली दरों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे किसानों और गरीब उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि निजीकरण से कर्मचारियों और इंजीनियरों की छंटनी का खतरा भी पैदा हो सकता है। इसलिए बिजली कर्मचारी संगठन इस बिल का देशभर में संगठित रूप से विरोध करेंगे।
बिजली संशोधन बिल के विरोध में 12 फरवरी को प्रदेशभर में हड़ताल

