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जींद सिविल अस्पताल में पैरामेडिकल कॉलेज निर्माण की तैयारी तेज, प्रशासन ने मांगी भूमि की रिपोर्ट

जींद के सिविल अस्पताल परिसर में प्रस्तावित पैरामेडिकल कॉलेज के निर्माण की दिशा में प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हो गई है। स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने जिला प्रशासन से अस्पताल परिसर में उपलब्ध भूमि का विस्तृत विवरण मांगा है। इसके बाद स्वास्थ्य...

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जींद का सिविल अस्पताल-फाइल
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जींद के सिविल अस्पताल परिसर में प्रस्तावित पैरामेडिकल कॉलेज के निर्माण की दिशा में प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हो गई है। स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने जिला प्रशासन से अस्पताल परिसर में उपलब्ध भूमि का विस्तृत विवरण मांगा है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल की निर्मित और खाली भूमि का पूरा ब्यौरा तैयार कर जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यालय को भेज दिया है।

डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. पालेराम कटारिया द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, सिविल अस्पताल का कुल परिसर लगभग 23 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें करीब 9 एकड़ क्षेत्र में अस्पताल की इमारतें और अन्य निर्माण हैं, जबकि शेष भूमि खाली है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि मुख्यालय से स्वीकृति मिलती है, तो पैरामेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराई जा सकती है।

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डॉ. कटारिया ने बताया कि जिला प्रशासन ने अस्पताल परिसर की कुल भूमि, निर्मित क्षेत्र और खाली जमीन का विवरण निर्धारित प्रारूप में मांगा था। आवश्यक रिपोर्ट तैयार कर भेज दी गई है और अब अंतिम निर्णय स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय स्तर पर लिया जाएगा।

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युवाओं को मिलेगा स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर

पैरामेडिकल कॉलेज की स्थापना होने पर जींद सहित आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को मेडिकल क्षेत्र में रोजगारोन्मुख शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। वर्तमान में ऐसे पाठ्यक्रमों के लिए विद्यार्थियों को रोहतक, हिसार, करनाल और अन्य शहरों में जाना पड़ता है।

कॉलेज शुरू होने पर लैब टेक्नीशियन, रेडियोग्राफी, ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी, डायलिसिस, ईसीजी, ऑप्थैल्मिक, फिजियोथेरेपी समेत विभिन्न पैरामेडिकल पाठ्यक्रम स्थानीय स्तर पर संचालित किए जा सकेंगे। विद्यार्थियों को सिविल अस्पताल में ही इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण भी आसानी से प्राप्त होगा।

अस्पताल को भी होगा लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार, पैरामेडिकल कॉलेज शुरू होने से सिविल अस्पताल को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों की क्लीनिकल पोस्टिंग अस्पताल में होने से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की संभावना है। साथ ही भविष्य में आधुनिक प्रयोगशालाओं, प्रशिक्षण केंद्रों और अन्य चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

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