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अग्र भागवत कथा के दूसरे दिन श्री अग्रसेन महाराज के आदर्शों का भावपूर्ण वर्णन

अग्रवाल सभा भवन में आयोजित अग्र भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को कथा व्यास श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर नर्मदा शंकरपुरी महाराज ने श्री अग्रसेन महाराज के जीवन चरित्र, पराक्रम और सामाजिक आदर्शों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा व्यास ने...

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\Bअग्र भागवत कथा सुनाते श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर नर्मदा शंकरपुरी महाराज।- हप्र\B
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अग्रवाल सभा भवन में आयोजित अग्र भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को कथा व्यास श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर नर्मदा शंकरपुरी महाराज ने श्री अग्रसेन महाराज के जीवन चरित्र, पराक्रम और सामाजिक आदर्शों का भावपूर्ण वर्णन किया।

कथा व्यास ने बताया कि श्री अग्रसेन महाराज ने अद्भुत साहस, दूरदर्शिता और सामाजिक चेतना के बल पर आग्नेय पुरी (अग्रोहा नगरी) का निर्माण कराया, जो बारह योजन लंबी और चार योजन चौड़ी थी। उन्होंने एक लाख लोगों को बसाकर समाज में व्याप्त ऊंच-नीच और भेदभाव को समाप्त करने का कार्य किया।

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महामंडलेश्वर नर्मदा शंकरपुरी महाराज ने कहा कि एक रुपया, एक ईंट के सिद्धांत के माध्यम से श्री अग्रसेन महाराज ने समता, सहयोग और समाजवाद का संदेश दिया। इसी कारण उन्हें समाजवाद का प्रवर्तक माना जाता है।

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कथा में बताया गया कि अपने कुलगुरु गर्गाचार्य जी के आदेश पर श्री अग्रसेन महाराज ने नागराज महिधर की पुत्री माधवी से विवाह किया तथा उद्दालक ऋषि का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह विवाह शैव एवं वैष्णव संस्कृति के सुंदर संगम का प्रतीक बना। श्री अग्रसेन महाराज ने एक पत्नी व्रत का पालन करते हुए माता माधवी के साथ विवाह कर प्रजा का पुत्रवत पालन किया।

इस अवसर पर श्री अग्रसेन-माधवी विवाह की भव्य झांकी प्रस्तुत की गई, जिसके दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा व्यास ने श्री अग्रसेन महाराज को पुरुषार्थ का देवता बताते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

अग्र भागवत कथा का आयोजन समस्त अग्रवाल समाज के सहयोग से किया जा रहा है।

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