नितिन गडकरी ने फरीदाबाद शाहुपुरा सिक्स लेन हाईवे का निरीक्षण किया
कालिंदी कुंज में आधुनिक हाईवे परियोजना का प्रस्तुतीकरण, एनएचएआई अधिकारियों को दिए निर्देश
फरीदाबाद में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सोमवार को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के डीएनडी और केएमपी सेक्शन के तहत फरीदाबाद सेक्टर-65 शाहुपुरा एक्सेस कंट्रोल सिक्स लेन हाईवे का निरीक्षण करने पहुंचे।
इस दौरान उन्होंने जंक्शन के नक्शे का बारीकी से अवलोकन किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। वे यहां करीब 10 मिनट तक रुके। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, लोक निर्माण राज्य मंत्री रणबीर सिंह गंगवा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, हर्ष मल्होत्रा, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी और दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश साहिब वर्मा मौजूद रहे।
आधुनिक छह लेन एक्सेस कंट्रोल हाईवे परियोजना की समीक्षा की
इससे पहले गडकरी ने कालिंदी कुंज में आधुनिक छह लेन एक्सेस कंट्रोल हाईवे परियोजना का प्रस्तुतीकरण देखा और परियोजना की विशेषताओं की जानकारी दी। इसके बाद उनका काफिला मीठापुर होते हुए फरीदाबाद पहुंचा, जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।
निरीक्षण के दौरान एनएचएआई अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान गडकरी ने ब्रिज बेयरिंग्स में संभावित गड़बड़ी को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मानक पूरे नहीं पाए गए तो संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। इस पर अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि डिजाइन और गुणवत्ता में किसी तरह की कमी नहीं रखी जाएगी।
गडकरी ने कहा कि यह सिक्स लेन एक्सेस कंट्रोल प्वाइंट दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई और वडोदरा ट्रैफिक को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कॉरिडोर होगा। भारी लॉजिस्टिक ट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए इसकी तकनीक और गुणवत्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
करीब 10 मिनट निरीक्षण के बाद केंद्रीय मंत्री विशेष बस से वापस दिल्ली रवाना हो गए।
इस दौरान ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के टीम लीडर ने भी परियोजना की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि 31 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 3600 करोड़ रुपये है और कैल गांव के पास महत्वपूर्ण इंटरचेंज बनाया जा रहा है।
खास बात यह रही कि मंत्री का काफिला इलेक्ट्रिक वाहनों और ईवी बसों से संचालित रहा, जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। गडकरी ने कहा कि सरकार का फोकस ग्रीन और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर है, जो प्रदूषण कम करने के साथ यात्रा को भी आसान बनाएगा।
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दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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