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चरित्र, साहस और सामाजिक जिम्मेदारी से होता है राष्ट्र निर्माण : हरजीत डागर

मार्केट कमेटी हथीन के चेयरमैन हरजीत डागर ने कहा कि अमर शहीद दादा कान्हा रावत का जीवन स्मरण कराता है कि राष्ट्र निर्माण चरित्र, साहस और सामाजिक जिम्मेदारी से होता है। यदि समाज अपने बलिदानियों को भुला दे, तो उसकी...

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पलवल जिले के बहीन स्थित गौशाला में आयोजित समारोह में मार्केट कमेटी चेयरमैन हरजीत डागर को स्मृति चिन्ह् देते समाज के लोग। -हप्र
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मार्केट कमेटी हथीन के चेयरमैन हरजीत डागर ने कहा कि अमर शहीद दादा कान्हा रावत का जीवन स्मरण कराता है कि राष्ट्र निर्माण चरित्र, साहस और सामाजिक जिम्मेदारी से होता है। यदि समाज अपने बलिदानियों को भुला दे, तो उसकी आत्मा क्षीण हो जाती है। उनका जीवन अतीत की कथा मात्र नहीं, बल्कि आज के समाज विशेषकर युवाओं के लिए नैतिक दृढ़ता का जीवंत संदेश है।

उन्होंने कहा कि अमर शहीद दादा कान्हा रावत किसी राजसत्ता के शासक नहीं थे, बल्कि लोकचेतना के नेतृत्वकर्ता थे, जिनकी शक्ति जनता के विश्वास और सामुदायिक एकता से आती थी। चेसरमैन हरजीत अमर शही दादा कान्हा रावत की पावन स्मृति में उनके पैतृक गांव बहीन की गौशाला में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर समाज की ओर से उनका पगडी बांधकर व स्मृति चिन्ह् देकर सम्मान किया गया। समारोह में हजारों की संख्या में इलाके के लोग मौजूद थे।

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चेयरमैन हरजीत डागर ने कहा कि सत्रहवीं शताब्दी का उत्तर भारत राजनीतिक और धार्मिक उथल-पुथल से गुजर रहा था। मुगल सम्राट औरंगजेब के शासनकाल में 1679 में जजय़िा कर पुन: लागू हुआ, जिससे ब्रज और मेवात क्षेत्र में असंतोष बढ़ा। इसी पृष्ठभूमि में 1640 ईस्वी में हरियाणा के बहीन (वर्तमान पलवल) में जन्मे दादा कान्हा रावत ने ग्रामीण समाज को संगठित कर अन्यायपूर्ण कराधान और धार्मिक दबावों का विरोध किया। वे लोकपरंपराओं के अनुसार, उन्होंने जजिया कर और जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध प्रतिरोध का आह्वान किया। 1669 में जाट नेता गोकुला के विद्रोह के बाद क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया। इसी दौर में दादा कान्हा रावत ने खाप और पंचायतों के माध्यम से ग्रामीण स्वाभिमान की रक्षा का

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संकल्प लिया।

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