गुजविप्रौवि और सी-लैब के बीच एमओयू, बाल अधिकारों को शिक्षा से जोड़ने की पहल
बाल संरक्षण और बाल अधिकारों को अकादमिक ढांचे में मजबूत करने की दिशा में गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (गुजविप्रौवि), हिसार ने सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब), नई दिल्ली के साथ समझौता ज्ञापन...
बाल संरक्षण और बाल अधिकारों को अकादमिक ढांचे में मजबूत करने की दिशा में गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (गुजविप्रौवि), हिसार ने सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब), नई दिल्ली के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल को उच्च शिक्षा के साथ बाल अधिकारों को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
समझौते पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई और इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन (आईसीपी) के ट्रस्टी रजत कुमार ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. विजय कुमार, डीन इंटरनेशनल अफेयर्स प्रो. ओ.पी. सांगवान सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य संवेदनशील और जिम्मेदार मानव संसाधन तैयार करना है। यह समझौता ऐसे पेशेवर तैयार करने में मदद करेगा, जो नीति निर्माण, कानून, मीडिया और सामाजिक क्षेत्रों में बाल संरक्षण को मजबूत कर सकें।
कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने इसे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख और समाजोपयोगी शिक्षा मिलेगी।
एमओयू के तहत विश्वविद्यालय में स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा स्तर पर बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। साथ ही कौशल विकास, इंटर्नशिप, प्लेसमेंट सहायता और संयुक्त शोध कार्य भी किए जाएंगे। ये पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र के माध्यम से संचालित होंगे, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो सकें।
समझौते के अनुसार सी-लैब पाठ्यक्रमों की रूपरेखा और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा, जबकि विश्वविद्यालय आधारभूत संरचना और शैक्षणिक सहयोग प्रदान करेगा।
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दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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