अरावली में खनन : सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मेवात के 40 से अधिक गांवों में चिंता
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली अरावली पहाड़ियों को खनन के लिए खोलने के फैसले से मेवात क्षेत्र में गहरी चिंता फैल गई है। नीति आयोग के सबसे पिछड़े जिलों में शामिल नूंह के 40 से अधिक...
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली अरावली पहाड़ियों को खनन के लिए खोलने के फैसले से मेवात क्षेत्र में गहरी चिंता फैल गई है। नीति आयोग के सबसे पिछड़े जिलों में शामिल नूंह के 40 से अधिक गांवों सहित हरियाणा-राजस्थान के करीब 100 गांवों पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस फैसले के विरोध में मेवात आरटीआई मंच ने नायब तहसीलदार नगीना के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, राज्यपाल, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को ज्ञापन भेजकर पुनर्विचार की मांग की है। मंच के अध्यक्ष सुबोध कुमार जैन ने चेतावनी दी कि खनन शुरू होने से न केवल गांवों का अस्तित्व, बल्कि ऐतिहासिक मंदिर, मस्जिद, दरगाह और किले भी खतरे में पड़ जाएंगे।
पर्यावरणविद राजूद्दीन जंग ने कहा कि अरावली उत्तर भारत का प्राकृतिक सुरक्षा कवच है, जो भू-जल रिचार्ज, तापमान संतुलन और रेगिस्तान की धूल रोकने में अहम भूमिका निभाता है। वहीं मंच के उपाध्यक्ष नसीम ने बताया कि अरावली के कमजोर होने से भू-जल स्तर और गिरेगा, गर्मी और प्रदूषण बढ़ेगा, इसीलिए स्थानीय लोग इसे अपने अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा मान रहे हैं।

