Make in Haryana : ‘मेक इन हरियाणा’ से ‘फ्यूचर रेडी हरियाणा’ की ओर बड़ा कदम, गुरुग्राम बनेगा एआई और ग्लोबल टेक हब, गांवों तक पहुंचेगा इंडस्ट्रियल ग्रोथ मॉडल
‘मेगा इंडस्ट्रियल मास्टरप्लान’: कैबिनेट में एक साथ 10 इंडस्ट्रियल पॉलिसियों की मंजूरी, अब एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और एग्री-बिजनेस से बदलेगी प्रदेश की तस्वीर
Make in Haryana : हरियाणा ने सोमवार को औद्योगिक और आर्थिक विकास के मोर्चे पर ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला, जिसने उसे देश के सबसे आक्रामक निवेशक राज्यों की कतार में ला खड़ा किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को यहां हुई कैबिनेट बैठक में उद्योग, टेक्नोलॉजी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, एग्री-बिजनेस, डेटा सेंटर, गेमिंग, ई-वेस्ट और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत 10 बड़ी नीतियों को एक साथ मंजूरी देकर सरकार ने साफ संदेश दिया कि अब हरियाणा ‘न्यू एज इकोनॉमी’ की दिशा में तेज रफ्तार से आगे बढ़ेगा।
संभवतः हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां एक ही कैबिनेट बैठक में उद्योग जगत से जुड़ी 10 बड़ी नीतियों को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री का दावा है कि इन नीतियों से अगले कुछ वर्षों में लाखों रोजगार पैदा होंगे और हरियाणा नई पीढ़ी के उद्योगों का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। मुख्यमंत्री सैनी ने इन नीतियों को अंतिम रूप देने से पहले खुद उद्योगपतियों, स्टार्टअप संस्थापकों और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के साथ लंबी बैठकें कीं।
पूरी रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘विकसित भारत-2047’ विजन के अनुरूप तैयार की गई है। इन दस औद्योगिक नीतियों के जरिये सरकार ने प्रदेश में 5 लाख करोड़ के निवेश और 10 लाख युवाओं को रोजगार का लक्ष्य रखा है। सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए समयबद्ध क्लियरेंस और भुगतान व्यवस्था भी लागू की है। प्रोत्साहन राशि देने में देरी होने पर 8 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा। भूमि व्यवहार्यता प्रमाण पत्र के जरिए 45 दिनों में जमीन से जुड़े सभी तथ्य स्पष्ट किए जाएंगे। साथ ही हरियाणा कौशल रोजगार निगम पोर्टल के जरिए स्थानीय युवाओं की भर्ती करने वाली कंपनियों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
‘मेक इन हरियाणा’ बनेगी इंडस्ट्री की नई मास्टर पॉलिसी
कैबिनेट ने ‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026’ को मंजूरी देकर राज्य के औद्योगिक मॉडल को पूरी तरह री-डिजाइन कर दिया है। सरकार ने अगले पांच वर्षों में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश और 10 लाख रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा है। पुरानी ए, बी, सी और डी ब्लॉक व्यवस्था खत्म कर अब कोर, इंटरमीडिएट, सब-प्राइम और प्राइम/फोकस एरिया मॉडल लागू किया जाएगा। स्थानीय युवाओं को नौकरी देने वाली कंपनियों को प्रति कर्मचारी सालाना एक लाख रुपये तक प्रोत्साहन मिलेगा। महिलाओं, दिव्यांगों, अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों के लिए यह सहायता 1.20 लाख रुपये तक होगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर पर बड़ा दांव
नई इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग नीति के जरिए हरियाणा अब इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निवेश का बड़ा केंद्र बनने की तैयारी में है। आईएमटी सोहना में 500 एकड़ में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जाएगा। सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट, चिप डिजाइन और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को आकर्षित करने के लिए 200 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत सहायता देगी।
फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को नई ताकत
कोविड के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की जरूरत को देखते हुए सरकार ने फार्मास्यूटिकल एवं मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग नीति को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत दवा निर्माण, मेडिकल उपकरण, क्लीनिकल ट्रायल और हेल्थ टेक सेक्टर में निवेश बढ़ाने पर फोकस रहेगा। महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति और दवा निर्माण इकाइयों को जरूरी सेवाओं का दर्जा देने जैसे प्रावधान भी किए गए हैं।
खिलौनों और स्पोर्ट्स इक्विपमेंट का बनेगा हब
सरकार ने टॉयज एवं स्पोर्ट्स इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग नीति लाकर एक नए सेक्टर पर दांव लगाया है। स्मार्ट टॉयज, साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग व मैथेमेटिक्स (एसटीईएम) आधारित खिलौने, इको-फ्रेंडली टॉयज और हाई-वैल्यू स्पोर्ट्स इक्विपमेंट निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार ने इस सेक्टर में 5,000 करोड़ निवेश और 25 हजार रोजगार का लक्ष्य रखा है।
ई-वेस्ट को ‘ग्रीन गोल्ड’ में बदलने की तैयारी
हरियाणा अब इलेक्ट्रॉनिक कचरे को भी बड़े उद्योग में बदलने की रणनीति पर काम करेगा। नई ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग नीति के तहत ई-वेस्ट कलेक्शन, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग को संगठित ढांचे में लाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रीन रोजगार बढ़ेंगे और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से दोबारा उपयोग योग्य कच्चा माल तैयार किया जा सकेगा।
गुरुग्राम बनेगा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर कैपिटल
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) नीति के जरिए सरकार की नजर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बैकएंड ऑपरेशन, रिसर्च और टेक्नोलॉजी सेंटर पर है। हरियाणा में पहले से 270 से अधिक जीसीसी मौजूद हैं। नई नीति के तहत अगले कुछ वर्षों में 100 नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। गुरुग्राम में विशेष सिंगल विंडो सिस्टम और निवेशक सहायता डेस्क बनाई जाएगी।
एआई, साइबर सिक्योरिटी और ब्लॉकचेन पर फोकस
आईटी/आईटीईएस, एआई एवं उभरती प्रौद्योगिकी नीति के जरिए सरकार हरियाणा को डिजिटल टेक्नोलॉजी हब बनाना चाहती है। गुरुग्राम में ग्लोबल एआई सेंटर और पंचकूला में एडवांस कंप्यूटिंग फैसिलिटी स्थापित होगी। एआई, ब्लॉकचेन, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे। 50 हजार युवाओं को हाई-टेक स्किल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है।
गेमिंग, एनीमेशन और एक्सआर इंडस्ट्री को मिलेगा बढ़ावा
नई एवीजीसी-एक्सआर नीति के जरिए सरकार एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी सेक्टर में निवेश आकर्षित करेगी। राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के सहयोग से गेमिंग और डिजिटल कंटेंट निर्माण के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। सरकार मानती है कि आने वाले वर्षों में यह सेक्टर युवाओं के लिए बड़े रोजगार अवसर पैदा करेगा।
डेटा सेंटर इकोनॉमी में भी एंट्री
डेटा सेंटर नीति के जरिए हरियाणा अब एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव लगाने जा रहा है। राज्य सरकार डेटा सेंटर निवेशकों को बिजली, एफएआर, पूंजीगत सहायता और ऑपरेशनल सपोर्ट देगी। बड़े हाइपर डेटा सेंटर और डेटा पार्कों को विशेष पैकेज मिलेगा।
किसानों को उद्योग से जोड़ने की तैयारी
एग्री बिजनेस एवं एग्रो प्रोसेसिंग नीति के तहत फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, फूड पार्क, पैकेजिंग यूनिट और टेस्टिंग लैब को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को फसलों का बेहतर दाम मिलेगा, पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान कम होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इस नीति के जरिए 5,000 करोड़ रुपये निवेश और 30 हजार रोजगार का लक्ष्य रखा गया है।
कैबिनेट ने उद्योग, तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को एक साथ गति देने के लिए 10 नई नीतियां लागू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इन नीतियों का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि युवाओं को बड़े स्तर पर रोजगार देना, स्थानीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना और हरियाणा को भविष्य की अर्थव्यवस्था का अग्रणी राज्य बनाना है। ‘मेक इन हरियाणा’ के माध्यम से प्रदेश को निवेश, नवाचार, निर्यात और रोजगार का राष्ट्रीय हब बनाया जाएगा।
-नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री।
हरियाणा अब पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ एआई, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, फार्मा, गेमिंग और एग्री प्रोसेसिंग जैसे नए सेक्टर्स में भी देश का अग्रणी निवेश गंतव्य बनने जा रहा है। एक ही कैबिनेट बैठक में 10 औद्योगिक नीतियों को मंजूरी मिलना अपने आप में ऐतिहासिक कदम है। नीतियों से बड़े निवेश के साथ एमएसएमई सेक्टर को भी नई ताकत मिलेगी। सरकार ने उद्योगों के लिए पारदर्शी, तेज और निवेशक अनुकूल व्यवस्था तैयार की है, जिससे रोजगार और औद्योगिक विकास दोनों को रफ्तार मिलेगी।
