एमडीयू के पूर्व कुलपति समेत 24 पर लोकायुक्त ने मांगी रिपोर्ट
उच्च शिक्षा विभाग से जवाब तलब, 19 अक्तूबर को होगी अगली सुनवाई
हरियाणा लोकायुक्त ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के पूर्व कुलपति समेत 24 लोक सेवकों के खिलाफ दायर शिकायत पर अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग से 30 दिन में रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट मिलने के बाद उसकी प्रति शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वह अपनी आपत्तियां दाखिल कर सके। मामले की अगली सुनवाई 19 अक्तूबर, 2026 को होगी।
आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. जयपाल ने हरियाणा लोकायुक्त अधिनियम, 2002 की धारा-10 के तहत शिकायत दायर की है। इसमें दो पूर्व कुलपति, पूर्व कुलसचिव, तत्कालीन डीन अकादमिक और कार्यकारी परिषद के सदस्यों सहित 24 लोक सेवकों पर विभिन्न आरोप लगाए गए हैं।
यूजीसी नियमों के उल्लंघन का आरोप
शिकायत के अनुसार, विश्वविद्यालय में यूजीसी और हरियाणा सरकार के नियमों के विपरीत प्रोफेसर से सीनियर प्रोफेसर (सीएएस) पदोन्नति दी गई। साथ ही, पुनर्नियोजन नीति के विपरीत सेवानिवृत्त शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति की गई। आरोप है कि यूजीसी ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग विनियम-2020 के विपरीत पुनर्नियोजित शिक्षक को सीडीओई के निदेशक का प्रशासनिक प्रभार भी सौंपा गया।
शिकायतकर्ता ने जांच की मांग की
डॉ. जयपाल का आरोप है कि नियमों के अनुरूप निर्णय लेने का आग्रह करने के बावजूद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिससे विश्वविद्यालय को आर्थिक नुकसान हुआ। उन्होंने मामले की जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और कथित वित्तीय लाभ की वसूली की मांग की है।
किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ : पूर्व कुलसचिव
इस संबंध में पूर्व कुलसचिव प्रो. गुलशन लाल तनेजा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। उनकी पुनर्नियुक्ति और पदोन्नति पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई है तथा हरियाणा सरकार और यूजीसी के सभी नियमों का पालन किया गया है।

