गुड़ियानी धाम में बिखरी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आभा
Bal Mukund Gupt इन्दिरा गांधी विश्वविद्याल मीरपुर के हिंदी विभाग द्वारा 'साहित्य-संस्कृति संवाद' शृंखला के अंतर्गत महान साहित्यकार बाबू बालमुकुंद गुप्त की जन्मस्थली रेवाड़ी के गुड़ियानी धाम के लिए एक दिवसीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक यात्रा का आयोजन किया गया। इसका...
Bal Mukund Gupt इन्दिरा गांधी विश्वविद्याल मीरपुर के हिंदी विभाग द्वारा 'साहित्य-संस्कृति संवाद' शृंखला के अंतर्गत महान साहित्यकार बाबू बालमुकुंद गुप्त की जन्मस्थली रेवाड़ी के गुड़ियानी धाम के लिए एक दिवसीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक यात्रा का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को हिंदी साहित्य के अनमोल स्तंभ गुप्त की विरासत और उनके सांस्कृतिक अवदान से रूबरू कराना था। बाबू बालमुकुंद गुप्त परिषद के महासचिव सत्यवीर नाहड़िया के सहयोग से सरपंच नरेन्द्र ने विश्वविद्यालय के दल का गर्मजोशी से स्वागत किया।
Bal Mukund Gupt कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने विश्वविद्यालय परिसर से यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि साहित्यिक भ्रमण केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवंत इतिहास से साक्षात्कार है। बाबू बालमुकुंद गुप्त जैसे मनीषियों के पदचिह्नों पर चलकर ही विद्यार्थी अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति गर्व का अनुभव कर सकते हैं।
Bal Mukund Guptप्रो. सुनील कुमार ने कहा कि ऐसे भ्रमणों से विद्यार्थियों का न केवल बौद्धिक विकास होता है, बल्कि वे अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास से भी जुड़ते हैं। प्रो. करण सिंह व प्रो. पंकज त्यागी ने इस यात्रा को अकादमिक शोध और सांस्कृतिक चेतना के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि गुप्त जी ने जिस निर्भीकता से 'शिव शंभू के चिट्ठे' लिखे वह आज के शोधार्थियों के लिए सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है।
गुड़ियानी पहुंचने पर 'बाबू बालमुकुंद गुप्त की विरासत' विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। पत्रकार मनोज गोयल ने गुप्त जी की निर्भीक पत्रकारिता पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों ने गुप्त जी के पैतृक स्थल का भ्रमण किया और उनके जीवन दर्शन को समझा। समापन सत्र में हिंदी विभागाध्यक्ष डाॅ. मंजु पुरी द्वारा सरपंच को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

