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Khalistan Threat : खालिस्तानियों की सीएम नायब सैनी को जान से मारने की धमकी: गुरुग्राम के स्कूलों और ट्रेनों में धमाकों का अल्टीमेटम

ईमेल भेजकर हरियाणा के मुख्यमंत्री को विधानसभा में समर्थन का अल्टीमेटम दिया

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सीएम नायब सैनी
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Khalistan Threat : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को 'खालिस्तान नेशनल आर्मी' की ओर से जान से मारने की सीधी धमकी मिली है। मंगलवार सुबह गुरुग्राम के कई प्रतिष्ठित स्कूलों को भेजे गए एक ईमेल में मुख्यमंत्री को निशाना बनाने के साथ-साथ शहर के स्कूलों और ट्रेनों को बम से उड़ाने का अल्टीमेटम दिया गया है। इस सनसनीखेज ईमेल के बाद प्रदेश की तमाम सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया विभाग अलर्ट पर हैं।

ईमेल में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का नाम लेते हुए उन्हें सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है। पत्र में लिखा गया है कि मुख्यमंत्री के पास 'एक मौका' है, यदि उन्होंने हरियाणा विधानसभा में खालिस्तान रेफरेंडम का समर्थन नहीं किया या पंजाब के साथ जुड़ने का विरोध किया, तो उनकी "जिंदगी खत्म" कर दी जाएगी। इसके अलावा, पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के खिलाफ भी अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें सिखों का दुश्मन बताया गया है। इसमें हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का बदला लेने की बात भी कही गई है।

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स्कूलों और ट्रेनों में धमाकों का समय तय

ईमेल में न केवल मुख्यमंत्री को धमकी दी गई है, बल्कि आम जनता और बच्चों को भी निशाना बनाने की बात कही गई है। मंगलवार सुबह 7:13 बजे प्राप्त हुए इस संदेश के अनुसार, दोपहर 1:11 बजे गुरुग्राम के स्कूलों में और दोपहर 3:11 बजे ट्रेनों में सिलसिलेवार बम धमाके शुरू करने का दावा किया गया है। यह ईमेल विशेष रूप से डीएवी स्कूल सेक्टर-14, सेक्टर-49 और डीएवी पीपीएसजी को भेजा गया है। पत्र के ऊपर 'हरियाणा है खालिस्तान' और 'अपने बच्चे बचाओ' जैसे भड़काऊ नारे भी लिखे गए हैं।

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पुलिस और साइबर सेल की कार्रवाई

धमकी की सूचना मिलते ही गुरुग्राम पुलिस के आला अधिकारी और बम निरोधक दस्ता हरकत में आ गया है। संबंधित स्कूलों में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। ईमेल भेजने वाले के रूप में 'इंजीनियर गुरनाख सिंह' और 'डॉ. गुरनिरवैर सिंह' का नाम दर्ज है। साइबर सेल की टीमें ईमेल के आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रैक कर रही हैं ताकि भेजने वाले का पता लगाया जा सके। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी लावारिस वस्तु को न छुएं और सतर्क रहें।

 कब-कब हरियाणा और चंडीगढ़ के स्कूलों को मिली धमकियां

पिछले कुछ महीनों में हरियाणा और चंडीगढ़ के शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाकर दहशत फैलाने की कई कोशिशें हुई हैं। इन घटनाओं का विवरण इस प्रकार है:

  • 19 जनवरी: अंबाला के 3 स्कूलों को 'हरियाणा बनेगा खालिस्तान' के संदेश के साथ धमकी मिली।
  • 28 जनवरी: चंडीगढ़ के 26 स्कूलों को एक साथ ईमेल भेजकर डराया गया।
  • 11 फरवरी: मोहाली के 16 निजी स्कूलों को 'ह्यूमन बम' हमले की चेतावनी मिली।
  • 27 फरवरी: चंडीगढ़ के शिवालिक पब्लिक स्कूल और कार्मल कॉन्वेंट सहित कई स्कूलों को फिर निशाना बनाया गया।
  • 2 मार्च: जालंधर के 2 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई।
  • 10 मार्च (आज): गुरुग्राम के कई स्कूलों को ईमेल मिला, जिसमें दोपहर 1:11 बजे धमाके का दावा किया गया।

जांच के घेरे में 'खालिस्तान नेशनल आर्मी'

ईमेल में खालिस्तान जनमत संग्रह (Referendum) का भी समर्थन करने की बात कही गई है। पुलिस की साइबर सेल अब इस ईमेल के स्रोत (Source) की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह किसी की शरारत है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश। अधिकारियों के अनुसार, सभी तथ्यों की गहनता से जांच की जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

आखिर क्यों पुलिस की पहुंच से दूर हैं ये 'faceless' हमलावर ?

दैनिक ट्रिब्यून द्वारा इस विषय पर किए गए विश्लेषण के अनुसार, इन धमकियों को 'ईमेल टेरर' (Email Terror) का नाम दिया गया है। इसके पीछे की तकनीकी बाधाएं कुछ इस प्रकार हैं:

  1. विदेशी कनेक्शन (Foreign Link): जांच में पाया गया है कि अधिकतर ईमेल जर्मनी, रूस या अमेरिका के डोमेन प्रोवाइडर्स और सर्वरों के माध्यम से भेजे जाते हैं।

  2. इनविजिबल रूटिंग (VPN & Tor): हमलावर 'Tor' ब्राउज़र और कई परतों वाले VPN (Virtual Private Network) का उपयोग करते हैं, जो उनके असली आईपी एड्रेस को छुपा देते हैं। इससे पुलिस के लिए लोकेशन ट्रैक करना बेहद जटिल हो जाता है।

  3. मनोवैज्ञानिक युद्ध: सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इनका मकसद वास्तविक धमाका करना नहीं, बल्कि जनता में पैनिक पैदा करना और सरकारी मशीनरी को व्यस्त रखना है।

  4. बदलता नैरेटिव: शुरूआती धमकियों में दक्षिण भारतीय उग्रवादी समूहों का नाम लिया गया था, लेकिन अब यह 'खालिस्तानी अलगाववाद' की ओर मुड़ गया है।

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