गांव गोठड़ा अहीर के सैनिक स्कूल में कटारी व अर्जन सदन बने फुटबॉल चैंपियन
रेवाड़ी-नारनौल हाईवे स्थित गांव गोठड़ा अहीर के सैनिक स्कूल में अंतर सदनीय फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यालय के छह सदनों—सुब्रोतो, अर्जन, मानेकशॉ, कटारी, करियप्पा और परेरा—ने भाग लिया। प्रतियोगिता लीग आधार पर आयोजित की गई, जिसके...
रेवाड़ी-नारनौल हाईवे स्थित गांव गोठड़ा अहीर के सैनिक स्कूल में अंतर सदनीय फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यालय के छह सदनों—सुब्रोतो, अर्जन, मानेकशॉ, कटारी, करियप्पा और परेरा—ने भाग लिया। प्रतियोगिता लीग आधार पर आयोजित की गई, जिसके बाद फाइनल मुकाबले खेले गए।
वरिष्ठ वर्ग में कटारी सदन और करियप्पा सदन के बीच फाइनल मुकाबला हुआ, जिसमें कटारी सदन ने 4-1 से जीत दर्ज कर ट्रॉफी अपने नाम की। वहीं, कनिष्ठ वर्ग के फाइनल में अर्जन सदन ने सुब्रोतो सदन को 1-0 से हराकर खिताब जीता।
इसके अलावा, बालिका कैडेटों के लिए भी फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस वर्ग में कारगिल सदन ने रेजांगला सदन को 1-0 से पराजित कर जीत हासिल की।
कार्यवाहक प्राचार्य एवं प्रशासनिक अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल जयसिंह राठौड़ ने विजेता टीमों को प्रमाण-पत्र और स्वर्ण पदक तथा उपविजेताओं को रजत पदक प्रदान किए। इस अवसर पर उप प्राचार्या स्क्वाड्रन लीडर वंदना चौधरी और वरिष्ठ अध्यापक गजेंद्र सिंह चौहान भी उपस्थित रहे।
प्रतियोगिता में वरिष्ठ वर्ग में कैडेट नितिन (करियप्पा सदन) और कनिष्ठ वर्ग में कैडेट रविशचंद्र (अर्जन सदन) को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। प्राचार्य ने कहा कि सैनिक स्कूल का उद्देश्य कैडेट्स को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के लिए तैयार करना है, जिसमें खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कैडेट्स के अनुशासन, खेल भावना और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की।
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दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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