हरियाणा के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता करण सिंह दलाल ने पलवल के सुल्तानपुर क्षेत्र में यमुना नदी में अवैध खनन का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे नेताओं के दबाव में जिला प्रशासन ग्रामीणों की शिकायतों को अनसुना कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस बड़े नेता के संरक्षण में यह अवैध खनन किया जा रहा है।
करण दलाल ने चेतावनी दी कि यदि यमुना में हो रहा अवैध खनन अविलंब बंद नहीं हुआ तो वे इस मामले को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दायर करेंगे। वह बृहस्पतिवार को अपने निवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कांग्रेस नेता महावीर तंवर तथा सुल्तानपुर गांव के कई ग्रामीण भी मौजूद थे।
खुलेआम चल रहा अवैध खनन : करण दलाल
पूर्व मंत्री दलाल ने ग्राम पंचायत सुल्तानपुर के सरपंच द्वारा यमुना में हो रहे अवैध खनन के संबंध में जिला प्रशासन को दी गई शिकायतों की प्रतियां पत्रकारों को दिखाते हुए कहा कि बार-बार शिकायतें देने के बावजूद यह अवैध खनन खुलेआम फल-फूल रहा है। इसका सीधा कारण सत्ता का दबाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश और देश में बनी सरकार को जन-सरोकारों और जन-भावनाओं से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेता केवल जुमलेबाजी कर जनता को गुमराह कर रहे हैं और जाति, धर्म व धार्मिक आस्था के नाम पर लोगों को बांटकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। मुख्यमंत्री और मंत्री केंद्र के नेताओं द्वारा दिया गया पाठ रटकर जनता के सामने पढ़ देते हैं, जबकि जमीनी हकीकत से उनका कोई सरोकार नहीं होता।
करण दलाल ने पलवल–नूंह सड़क मार्ग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिले में विकास की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। जर्जर सड़क के कारण हजारों लोगों को सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होना पड़ा है। वहीं पलवल नगर परिषद की सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। गलियों और सड़कों पर कूड़े के ढेर प्रशासन की कार्यशैली की पोल खोल रहे हैं। सफाई कर्मचारियों को कई-कई महीनों से वेतन नहीं मिला है और सफाई व्यवस्था के नाम पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में प्रतिदिन संविधान की मर्यादाओं का उल्लंघन हो रहा है। पूर्व मंत्री ने कहा कि पलवल की जनता ने उन्हें पांच बार विधायक चुना है, इसलिए वे जनता के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाते रहेंगे। अन्याय के खिलाफ चाहे कितना भी बड़ा आंदोलन करना पड़े, वे पीछे नहीं हटेंगे।

